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ब्लॉग्स (163)
एक दिन हमारे मुल्लाजी रास्ते पर कुछ ढूँढ रहे थे। उन्हे देखकर वहाँ से गुजरनेवाले लोग पुछने लगे ' मुल्लाजी आखिर क्यां ढूँढ रहे है आप ? मुल्ला ने कहाँ 'में अपनी चाबी... आगे पढ़ें...

अब तीसरे बुद्धिजीवी की बारी थी यह व्यक्ति बहुत चालाक था। उसने मुल्ला के जवाब में से ही अपना सवाल ढूँढ लिया। उसने मुल्ला से कहाँ आप को गधो के बारे में अच्छी मालूमात है। अब जरा यह भी बता दिजीए की 'आपके गधे की पूँछ में कितने बाल है ?... आगे पढ़ें...

'30 जनवरी का वह दिन आज भी मुझे याद है उस समय में हिंदुस्तान टाईम्स में काम कर रहाँ था और हमे हमारे संपादक ने इस घटनाक्रम कें बारे में... आगे पढ़ें...

उनकी गलती सिर्फ इतनी थी की उन्होने रोशनी के ईलेक्ट्रीक तार को महात्माजी के गले में डाल दी बस फिर क्यां होना था। बस जन्म ले लिया एक नये विवाद ने... आगे पढ़ें...

नसीरुद्दिन हमेशा अपने गध्धो के साथ एक नगर से दूसरे नगर में घुमा करते थे। कभी-कभी दूसरे नगर में प्रवेश करने में रात हो जाती थी। वह हमेशा अपने गध्धो पर कुछ घरेलू सामान लेकर जाते थे। चोर-लूटैरो से बचने के लिए वो हमेशा उस सामान के उपर सूखी घास रख देते थे जीससे... आगे पढ़ें...

एक दिन हमारे मुल्ला नसीरुद्दिन के पास एक शख्स आया वह थोडा दुविधा मे था। उसे देख मुल्ला बोले, ' क्यां बात है तुम चिंतित क्यों हो' ? शख्स बोला ' मुल्लाजी में एक सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पा रहा हुं... आगे पढ़ें...

अभी एक ब्लॉग में स्व. रामानंद सागर के परिवार और धीरज कुमार के बारे में पढ़ा। हमारे एक भाई साहब ने उनके बारे में काफी कुछ लिखा है जिसमें प्रशंसा कम आपना आंतरिक रोष ज्यादा है। आगे पढ़ें...

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन इतने गरीब हो गये कि उनको घर घर भटक के भीख मागने का समय आ गया। मुल्ला का बडी मुश्किल से पेट भरता था.... आगे पढ़ें...

20 साल पहले रविवार के दिन सभी शहरों और गाँवों में लोग अपना सारा काम छोड़कर इडियट बॉक्स (टीवी) के सामने बैठ जाते थे, क्योंकि उनका पसंदीदा धारावाहिक 'रामायण' प्रसारित होता था। रामानंद सागर के इस पौराणिक धारावाहिक ने उस समय सफलता के तमाम परचम लहराए थे और लोगों के दिलों पर राज... आगे पढ़ें...

मैंने ऐसा तो कुछ गलत नहीं कहा था कि तुम सब के सामने मुझे डाँटने लगे। तुम नहीं जानते मेरे दिल पर क्या बीत रही है। हर बार तुम अपने प्यार का वास्ता दे देते हो। हर बार तुम ही कहते रहते हो कि... आगे पढ़ें...

' द वन वु केअर मोस्ट ' यहीं विषय था उस प्रतियोगिता का जीसमे सभी प्रतिभागियो ने भाग लिया। इन प्रतिभागियो में एक छोटा प्रतिभागी भी था जिसकी उमर सिर्फ दस साल की थी और यहीं बच्चा स्पर्धा में विजयी हुआ। आखिर उसने एसा क्यां किया जो उसे ईनाम मिला ? आगे पढ़ें...

हम- तुम हम : अरे तुम आज तुम बडे. ही खुश दिख रहे हो...कुछ खास बात है क्यां ? तुम : हा में नन्ने को अरे सोरी 'नैनो' को खरीदने जा रहा हु... आगे पढ़ें...

नैनो में सपना, सपना में सजना, सजना पे दिल आ गया कि सजना पे दिल आ गया ' ' लेकिन यहाँ पर तो सजना पर नहीं बल्कि नैनो पर ही सब का दिल आ गया है। जी हाँ यहाँ पर हम किसी के कजरारे नैनो की बात... आगे पढ़ें...

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