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चाँदनी चौक टू विवाद

सीसी2सी अर्थात 'चाँदनी चौक टू चाईना' ... एक ऐसी उबाऊ फिल्म जो बॉक्स ओफिस के दरवाजे पर ठीक से दस्तक नहीं दे पायी| इस फिल्म से न तो भारतीय दर्शक जुड पाये और ना ही नेपाल की जनता।

बॉलिवुड की यह मेगा बजेट फिल्म बॉक्स ओफिस पर पूरी तरह असफल साबित हुई है । जिसने हॉलीवुड की फिल्म कंपनी वॉर्नर ब्रदर्स को भी घाटा दिलाया। अच्छी स्टार कास्ट होने पर भी यह फिल्म पूरी तरह फिकी साबित हुई।


एक समय पर लोगो का मानना था कि शाहरूख की सुपरहिट 'रब ने बनादी जोडी' और आमिर की ब्लोक बस्टर 'गजनी' को भी पीछे छोडकर यह फिल्म आंतरराष्ट्रीय मार्केट मे पूरा कारोबार कर लेंगी क्योंकि इस फिल्म को प्रमोट करने वाले हॉलीवुड की फिल्म कंपनी वॉर्नर ब्रदर्स जो थी। दूसरा कारण था अक्षय कुमार की आंतरराष्ट्रीय मार्केट में बढती जा रही लोकप्रियता।

इसके अलावा इस फिल्म को 61 स्क्रीनो में पेश किया गया जो उपरोक्त दोंनो फिल्मो की तुलना में ज्यादा थी। फिल्म के प्रीमियर भी यु.एस.ए, केनेडा और यु.के जैसे बडे बडे देशो में आयोजित किए गये लेकिन फिर भी यह फिल्म अपना जादू नहीं दिखा पाई। खैर यह तो थी फिल्म की असफलता से जुड़े हुए पहलूओं की बात अब वात करते है फिल्म से जुड़े विवाद की।


नेपाल में इस फिल्म को लेकर काफी विरोध हुआ । नेपाल की जनता ने तो यहा तक कह दिया की अब यहा पर कोई भी भारतीय फिल्म का आयोजन नहीं किया जाएंगा। दरअसल विरोध का कारण था फिल्म में भगवान बुद्ध के जन्म को लेकर छेडा गया मुद्दा । इस फिल्म में बताया गया है कि भगवान बुद्ध का जन्म भारत में हुआ था जबकि इतिहास यह कहता है कि भगवान बुद्ध नेपाल के लुंबिनी में जन्मे थे। फिल्म के लेखक श्रीधर राघवन और रजत अरोरा शायद इस बात को भूल गए। फिल्म के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी और निखील अडवाणी ने भी इस बात को नजरअंदाज कर दिया जिसका खामियाजा उनको भूगतना पड़ा।

नेपाल की आग बबुला जनता ने इस फिल्म के विरोध में 'फेस बुक' नाम के एक संगठन की रचना भी कर दी है। सनित महाराज नाम के एक विरोधीओ ने तो मीडिया के समक्ष भारतीयो को 'धोतीधारी' कहकर कहाँ है कि 'यह भारतीय लोंग भगवान बुद्ध के जन्म को भारत में दिखाकर अपनी सीमा लांघने का काम कर रहे है। वह लुंबिनी को अपने देश के एक भाग साबित करने पर तुले है। हम ऎसा कभी भी होने नहीं देंगे ।

वैसे देखा जाए तो नेपाल के विरोध से फिल्म पर ज्यादा कोई प्रभाव नहीं पड सकता क्योकिं नेपाल में गिने चूने सिनेमाघर है और यहाँ पर ज्यादातर भौजपुरी फिल्मे देखी जाती है । नेपाल का सिने उद्योग भी कुछ खास नहीं है । 'कोलिवुड' नाम से जाने जाती यहा की फिल्म इन्डस्ट्री का अभी इतना विकास नहीं हुआ है जितना होना चाहिए।

(आर्टिकल के बारे में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे... हिन्दी सुधारके पढ़े..जनक नाम तो याद रहेगा शायद )

प्रतिक्रियाएँ

Re: चाँदनी चौक टू विवाद
यहां तो अब्बास मस्तान, संजय लीला भंसाली एवं रामगोपाल वर्मा जैसे मंझे हुए निर्देशक मात खा जाते हैं तो वहां पर निलिख अडवानी जैसे असफल निर्देशक से क्या ज्यादा की उम्मीद कर सकते हैं.
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