खैर हमने टाईटैनिक को तो नहीं देखा
खार कर के जैक और रोज का पात्र जिसे लियोनार्डो और केट विलस्लेट ने निभाया था...लेकिन दोस्तों हम एक चरित्र को भूल गए है..जो इस दुर्घटना का प्रत्यक्ष साक्षी था...
शायद उसे फिल्म में कभी भी नहीं दिखाया गया... वास्तविक जीवन में भी यह चरित्र गुमनामी के साएँ में कही गूम हो गया... यह व्यक्ति था रोबर्ट हिचेन्च.
हिचेन्च इसी जहाज में काम करता था... हिचेन्च ने यह दुर्घटना अपनी आँखो से देखी थी...क्योंकि जब टाईटैनिक डूब रहा था तब वह भी वहा मोजूद था... बाद में वह लाईफ बोट की मदद से बच गया...
कहाँ जाता है कि इस दुर्घटना ने उसका जीवन ही बदल दिया..हमेशा खुश रहने वाला हिचेन्स बाद में बिल्कुल शोकार्त्त रहने लगा...वह हताशा और निराशा में इस प्रकार घिर गया कि कई बीमारियाँ उसके शरीर में घूस गई...वह एक नंबर का शराबी बन गया..
इस दुर्घटना ने उसे कुख्यात बना दिया... जब यह दुर्घटना घटित हुई तब हिचेन्स जहाज में लाईफ बोट बांट रहा था... जहाज के छ यात्रीयों ने उस पर आरोप लगाया कि उनके मांगने पर भी हिंचेन्स ने उन्हे लाईफ बोट नहीं दी... उसी दौरान अमेरिका की समाजसेविका मार्ग्रेट ''मोली' ब्राउन से उसकी बहस हुई... मार्गेट ने हिचेन्स को पानी में फेंक देने तक की धमकी दे डाली..
कोर्नवोल न्युलाईन में जन्मे हिचेन्स को बाद में सार्वजनिक तौर पर coward (कायर) धोषित किया गया... यह अपमान वह सह नहीं पाया...वह एक नंबर का नशेड़ी बन गया था.....तनाव ने उसे पूरी तरह जकड़ लिया...इतना ही नहीं कुछ समय के बाद उसे दीवालियाँ भी घोषित किया गया...
हिचेन्च ने कई बार आत्महत्या करने का प्रयास किया... कत्ल की कोशिश के तहत उसे पांच साल की जेल भी हुई...
दोस्तों हाल ही में लंडन में उसकी भतीजी बार्बरा क्लार्क (83) ने सार्वजनिक तौर पर अपने चाचा पर बयान दिया है... क्लार्क एक निवृत नर्स है... हाल ही में वह टर्की के डेवोन शहर में आयोजित टाईटैनिक की प्रदर्शनी में भाग लेने आई थी...
उसका कहना था कि उसके चाचा बहुत ही अच्छे इंसान थे... इस दुर्घटना ने उन्हे बहुत पीड़ित किया था... बार्बरा कहती है कि दुखदाई बात यह है कि उनके अंतिम समय में भी उनका परिवार उनके लिए कुछ भी नहीं कर सका...
हिचेन्स को टाईटैनिक में काम करने का गर्व था... लेकिन फिर भी लोगो ने उन्हे ऎसी सजा दी जिसके गुनेगार वह नहीं थे... वर्ष 1940 में 58 साल की उम्र में दिल के दौरे के कारन उनकी मृत्यु हुई...
आश्वर्य की बात तो यह है कि वह उस समय भी किसी जहाज पर थे...उनके पार्थीव शरीर को बाद में समुद्र के हवाले कर दिया गया...
दोस्तो..यह शख्त अपनी पूरी जिंदगी में अपमान और बदनामी का घूँट पीता रहाँ..लोगों ने उसकी बहुत निंदा की...हकीकत में वह ऎसा नहीं था जैसा लोग उसे मानते थे... खैर आज वह हमारे बीच में नहीं है... हम सिर्फ भगवान से इतनी प्राथना करेगे की उसकी आत्मा को शांति मिले..... .
(कृपया आर्टिकल के बारे में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे... हिन्दी सुधारके पढ़े..जनक नाम तो याद रहेगा शायद...)
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