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4 सितंबर, 2008


ब्लॉग्स (1)
हम : कैसे भूल पाऊँगा वो लम्हे जो तुम्हारे साथ मैने बिताये है...तुम्हे मालूम है आज वही लम्हे मुझे शूल बनकर चूभ रहे है...में क्या करु ? अब मुझसे सहा नहीं जाता...तुम : (मौन बेठी है.. ) हम : तुम्हारी हर बात मुझे रुलाती है... जब कभी भी तुम्हारी आवाज सूनना ... आगे पढ़ें...