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अखिल हारा तो क्या हुआ ?

बीजिंग ओलंपिक में एक समय पर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़े रहने वाले मुक्केबाज अखिल कुमार की चुनौती आज खत्म हो गई और वह ओलंपिक की दौड से बहार हो गए...

आज सुबह से ही दुनिया भर के लोगों की नजरे अपने अपने टीवी सेटो पर मंडी हुई थी... क्योंकि आज भारतीय मुक्केबाज अखिल कुमार का मुकाबला मोल्देवा के वीयेस्लाव के साथ था...


लेकिन यह क्या ? मुकाबला तो सिर्फ 12 मिनिट ही चला...और उतने में तो हार-जीत का परिणाम भी आ गया... यह परिणाम भारत की आशाओ के विपरीत था.. क्योंकि अखिल को वीयेस्लाव के हाथो ओलंपिक खेलों की 54 किलोग्राम बैंटम वेट (क्वार्टर फाइनल) में 3-10 से शिकस्त मिली थी...जो खुद में सबसे बड़ी पराजय थी..

अखिल की कामयाबी के लिये दुनिया भर के लोगो सुबह से प्रार्थना कर रहे थे...

खुद अखिल के माता पिता ने भी बेटे की सफलता के लिए क्वार्टर फाईनल खत्म न हो तब तक मौनव्रत रखा था...

अखिल के एक दोस्त दिलबाग ने गुड़गांव स्थित अपने आवास से राजस्थान के चुरू जिले में स्थित शालसार तीर्थ तक 400 किलोमीटर की पदयात्रा भी शुरू भी की थी.. लेकिन शायद यह सभी दुवाए और प्रार्थनाए भगवान को मंजूर नही थी..जेसे ही मुक्केबाजी का परिणाम आया सब की आँखे खुली की खुली ही रह गई...


अखिल के घर पर आज सुबह से ही लोगो की भीड़ जमा हुई थी...इन लोगो में अखिल के कुछ दोस्त भी थे... चौथे राउंड की सिर्फ कुछ सेकन्ड ही बाकी रही होगी कि अचानक वहा पर सन्नाटा छा गया...अखिल के माता-पिता किसी को कुछ बताए बगैर अपने घर के अंदर चले गए.. क्योंकि वह अपने लाल को हारते हुए नही देखना चाहते थे... भला दुनिया में कोन से मा-बाप अपनी नजरो के सामने अपने बेटे की पराजय देख सकते है...

12 मिनिट के इस मुकाबले ने पूरी तसबीर ही बदल डाली.... अखिल ओलिम्पिक से बहार हो गए... पूरे मेच में अखिल सिर्फ पंचीस मारते दिखे...उन्होने अपना स्वबचाव बहुत कम बार किया......


मेच के दौरान ही ऎसा लग रहा था कि शायद अखिल पर पूरी दुनिया का दबाव है... आखिर मीडिया और दुनिया भर के लोगो ने अखिल पर ज्यादा उमीदे जो छोड कर रखी थी.. ऎसे मौके पर किसी भी खिलाड़ी के उपर दबाव आना लाजमी हो जाता है..

बोक्सिंग प्रेमीओ के साथ साथ आज जो लोग इस खेल को अखिल की बजह से देख रहे थे वह भी मायूस हुए और जिन्हे बोक्सिंग स्पर्धा का टेक्निकल ज्ञान नहीं था वह भी निराश हुए... ......


दोस्तो आप को नहीं लगता की हमे इस निराशा को छोड़कर एक और सकारात्मक बात भी सोचनी चाहिए... हम सब जानते है कि काफी लम्बे अरसे के बाद भारत के बोक्सर ओलिंपिक के महासंग्राम में क्वार्टर फाईनल तक पहुँचने में सफल हुए है..

भारत के खेल इतिहास में शायद यह पहली बार घटित हुआ है कि भारत के तीन मुक्केबाज ओलिंपिक के क्वार्टर फाईनल तक पहुँचने में सफल रहे है ......


क्यां हुआ अगर अखिल हारा तो..? खेल का तो नियम ही है कि जो ज्यादा अच्छा खेलता है वही सफल रहेता है...एक को जीत मिलती है और दूसरे को हार...

खैर हमे निराश होने की जरुरत नहीं क्योंकि अखिल के बाद हमारे पास दो मुक्केबाज और है जिनका मुकाबला 20 तारीख को होने वाला है... अभी हमारे पास विजेंदर और जितेंदर है....

भगवान ने चाहा तो विजेंदर विजेता बनेगा और जितेंदर जीत कर भारत का नाम रोशन करेगा..


( दोस्तो आप क्या कहते है अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे..जनक..नाम तो याद रहेगा शायद )
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