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चीन की एक और धोखेबाजी

बीजिंग ओलंपिक के उद्धाटन समारोह में चीन ने पूरी दुनिया को 'मामा' बनाया है..अर्थात उसने पूरी दुनिया को ठगा है..शायद आपने ओलंपिक का उद्घाटन समारोह देखा हो तो आप भली भाँति जानते होगे समारोह के दौरान लाल फ्राक पहनकर एक छोटी सी लड़की ने स्टेडियम के बीच में खड़े रहकर गाना गाया था...

वह दिखने में बहुत सुंदर थी और गाना भी गा रही थी... क्यां वो सच में गाना गा रही थी ? नहीं भैया यह हम सब का वहम है... दरअसल वह तो सिर्फ अपने होठ हिला रही थी... गाना गाने वाली लड़की तो कोई और ही थी...

यह गीत पहले से ही रिकार्ड हो चूका था.. जब यह बात सब के सामने आई तो चीनी सरकार ने इस विवाद से जुड़े सभी सवालो पर अपनी कैची चला दी...

बीजिंग ओलपिंक के आयोजको ने इस बात का स्वीकार किया है कि उद्घाटन समारोह में लिन मियोके नाम की नौ साल की लड़की ने सब के सामने गाना गाया वह वास्तव में अपने होठ हिला रही थी...गाना गाने वाली लड़की तो कोई और ही है... ...


आखिर कौन है वह लड़की ?

उस लड़की का नाम यांग पीई है.. उसकी उम्र सात साल है... अब सवाल यह उठता है कि उस लड़की को स्टेज पर क्यों लाया नहीं गया... उसका जवाब यह है कि कुदरत ने उस लड़की को मधुर आवाज तो दी थी लेकिन सुंदर चहेरा नहीं दिया था... याँग के दाँत बराबर नहीं है और उसका चहेरा भी गोट-मटोल है.. इसी कारन सरकार के आदेशानुसार यांग को हटाकर लिन मियोके को स्थान दिया गया..

दोस्तो आप को यह भी बताना चाहूँगा कि यह समाचार चीन के कोई सरकारी आदेश के कारन प्रसिद्ध नहीं किये गए.. इससे जुड़ी खबरो को इन्टनेट पर भी रोक दिया गया था... चीन का मीडिया सरकारी नियंत्रण पर आधारित है..वहा की सरकार को जो खबर अच्छी नहीं लगती या फिर जो खबर देश हित में नहीं है उस खबर को वह बहार नहीं आने देती......


बाल गायिका को बदलने का निर्णय वहा के पोलित ब्युरो के एक शिर्ष अधिकारी ने लिया था... असली गायिका स्टेज पर सुदंर न दिखने के कारन नकली गायिका लिन मियोके को पसंद किया गया था...

चीन अपनी सफाई में कहता है कि याँग का चहेरा मासूम न दिखने के कारन हमने लिन को स्टेज पर आने का मौका दिया...

चलो जो भी हो... लेकिन चीन की यह धोखेबाजी अब सबके सामने आ गई है और वह इस मामले में पूरी तरह शर्मसार है.......


( आर्टिकल के बारे में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे...जनक नाम तो याद रहेगा शायद )

प्रतिक्रियाएँ

Re: चीन की एक और धोखेबाजी
आज दुनिया में ग्लैमर ही चल रहा है। किन्तु प्रतिभा का मूल्य तो होना ही चाहिए। अब खेल के मैदान में भी प्रतिभा को महत्व नहीं मिलेगा , तो फिर कहां इसकी उम्मीद की जा सकती है ?
Re: चीन की एक और धोखेबाजी
isame kaun see nayee baat hai. Chin to puraana dhhokhebaaz hai.
Re: चीन की एक और धोखेबाजी
शाबाश प्यारे जनक ( अरे नाम तो वाकइ याद रह गया )।
Re: चीन की एक और धोखेबाजी
इसे सकारात्मक तरीके से भी देख सकते हैं, जिस लड़की को स्टेज पर गाने के लिए चुना गया था उसकी आवाज़ अच्छी नहीं थी, तो किसी दूसरी लड़की को पार्श्वगायन का अवसर दिया गया. फिल्मों में ऐसा ही होता है. और गाने वाली लड़की को उसकी आवाज़ का पूरा श्रेय दिया गया. जिसका चेहरा अच्छा था उसे मंच पर लाया गया, और जिसकी आवाज़ बढ़िया थी उसे गाने का मौका दिया गया. इसमें ग़लत क्या है???
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