इस शख्स का नाम है. मानवेन्द्र सिंघ...प्रिन्स मानवेन्द्र सिंघ गोहिल... जो गुजरात के राजपीपला शहर के राजकुल से ताल्लुक रखते है..यह शख्स हाल ही में स्विडन गया..वहाँ जाने का उसका एक खास मकसद था.. यह आदमी भारत में बसने वाली LGBT Community के अधिकारों के लिए पीछले कई सालो से लड़ रहा है... उसकी एक सामाजिक संस्था भी है...जिसका नाम 'लक्ष्य' है...और इस 'लक्ष्य' का मुख्य लक्ष्य भारत में रहने वाले LGBT को अपने अधिकार दिलवाना है...
आखिर LGBT क्या है ? LGBT का अर्थ है... Lesbian, Gay, Bisexual and Transgender community...
स्विडन में हाल ही में आयोजित युरोप्राईड फेस्टिवल में उसे निमंत्रण मिला.. इस समारोह का मुख्य हेतु समाज में फेले LGBT लोगो को खुल कर बहार लाने का और उनको उनके पूरे अधिकार दिलवाने का है... जिसमें खुद स्विडन सरकार और वहाँ की कुछ सामाजिक संस्थाएँ भी सहयोगी बनी...
उन्ही में से एक संस्था HIV Sweden (An umbrella group formed by HIV positive people in Sweden) आने वाले कुछ ही दिनो में भारत का दौरा करेगी...वह 'लक्ष्य' की कार्यप्रणाली की पूरी जाँच करेगी
इतना ही नहीं लेकिन स्विडन सरकार द्रारा संचालित Swedish International Development Agency गोहिल को भारत में बसे समलिंगी लोगों के सामाजिक अधिकार के लिए आर्थिक और तकनीकी मदद भी करेगी..
स्विडन के कई बड़े नेता और सांसद भी इस कार्य में अपना सहयोग दे रहे है... वह आने वाले कुछ ही दिनो में भारत में LGBT Community को कानूनन मान्यता देने के लिये भारत के नेताओ से बातचीत भी करेंगे..
Noah Ark नाम की एक दूसरी संस्था भारत में LGBT Community के साथ किस प्रकार व्यवहार किया जा सकता है उसका प्रशिक्षण भी देगी...यह प्रशिक्षण खास करके परामर्शदाताओ के लिए होगा.. ..
गोहिल कहते है कि ' हमारे भारत में कई सारे समलिंगी लोग है...जो डर और खानदान की आबरू को बचाने के लिए खुलकर सामने नहीं आते... में सामने आया...और में चाहता हूँ कि यह लोग भी निडर बनकर सामने आए... भारत में इस समाज के लोगो को उनकी इच्छा के विरुद्ध शादी करने के लिए कहाँ जाता है... कुछ लोग ऎसी भी है जिन्हे खुद अपने ही परिवार के लोगो ने घर से बेघर कर दिया है... मुझे खुद को भी घर से निकाला गयाँ था...लेकिन में उनके दबाव में नहीं आया.. ..
दोस्तो काम उसका कुछ भी हो... वह खुद कुछ भी क्यों न हो...लेकिन आखिर में एक बात खतरे जेसी उभर रही है कि अगर गोहिल की भारत में सक्रियता को सहयोग मिलने लगा तो देश में LGBT Community को कानूनन मान्यता मिलने की प्रक्रिया शरू हो जाएगी.. जो शायद हमारे भारतीय समाज की संवरचना के लिए घातक सिद्ध हो... शायद इससे हमारे सामाजिक मापदंड जो सदिओ में निर्मित हुए है वह टूटने लगे... आप इस बारे में क्या सौचते है ? क्या यह समाज हित में सही है ? .क्या परदे की चीज को परदे से बहार करना चाहिए और अगर पडदा उठ गया तो...?
(दोस्तो आर्टिकल के बारे में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भैजे...जनक...नाम तो याद रहेगा शायद... )

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