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आखिर क्या करे एक माँ ?

'माँ बनो निकिता हम तुम्हारे साथ है'...

आज मुंबई की तमाम सामाजिक संस्थाएँ यही बात उस उस गुजराती महिला को कह रही है जो अपनी कानूनी लड़ाई पूरी तरह हार गई है.. यह सभी संस्थाए आज उसका साथ देने के लिए आगे आ चूकी है..यह साथ है मानवता का साथ..


निकिता के पेट में 26 सप्ताह का भृण है... वह उस रोगग्रस्त भ्रृण को पालना नहीं चाहती थी.. वह उसे इस दुनिया में आने देना नहीं चाहती थी..वह अपना गर्भपात करवाना चाहती थी... लेकिन कोर्ट ने उसे ऎसा करने की मंजुरी नहीं दी...


ऎसा नहीं था कि निकिता अपने बच्चे को प्यार नहीं करती लेकिन वह जानती है कि जब कभी भी वह मासूम इस दुनिया में कदम रखेगा तब उसकी पूरी जिंदगी पेसमेकर के सहारे ही बीतेंगी क्योंकि उस मासूम के हार्ट में जन्मजात खामी है..

निकीता यह बात अच्छी तरह जानती है... वह खुद भृण हत्या की विरोधी है...लेकिन वह उस बच्चे को आजीवन इस बीमारी का कष्ट देना नहीं चाहती...इसलिए तो उसने कानून के दायरे में रहकर मुंबई हाईकोर्ट का सहारा लिया...


अफसोस के साथ कहना पड़ रहाँ है कि हमारे कानून में ऎसी कोई धारा ही नहीं है कि जब खुद माँ अपने पेट में पल रहे रोगग्रस्त भृण से निजात पाना चाहे तो फैसला किसके पक्ष में आएगा...गर्भपात संबधिंत एक घारा वर्ष 1970 में लागू कि गई थी जिसे हम Medical Termination of Pregnancy (MTP) एक्ट कहते है..इस घारा के अनुसार सिर्फ 20 सप्ताह के भृण को नष्ट किया जा सकता है... लेकिन यहा पर निकिता का गर्भ 25 सप्ताह का था..

निकिता ने कोर्ट में सभी के हाथ भी जोडे लेकिन फिर भी मुंबई हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया वह निकीता के पक्ष में नहीं था... कोर्ट ने कहाँ निकिता को इस बच्चे को जन्म देना पड़ेगा.......


निकिता के गाईनोकोलोजिस्ट डा. निखिल दत्तार ने भी कोर्ट से कहाँ कि अगर निकिता का बच्चा जन्म लेता है तो उसमे जन्मजात विकृति याँ विकलांगता आ सकती है..लेकिन कोर्ट ने एक डाक्टर की बात को भी मान्य नहीं रखा..

न्यायाधिश आर एम एस खांडेपरकर और अमजद सैयद का कहना था कि आखिर हम उस महिला को कैसे भृण हत्या कि छूट दे सकते है जिसके गर्भ में पल रहे भ्रृण के जिवन जीने के थोड़े बहुत चांसिस है..

इस मामले के सामने आने पर हमेशा मीड़िया में रहेनेवाले स्वास्थ्य मंत्री अबुमणी रामोदास का भी कहना है कि ' गर्भपात कानून में कोई भी परिवर्तन नहीं लाया जाएगा..भृण के जन्म लेने के अधिकार से उसे कोई नहीं रोक सकता........


आज निकिता और उसके पति हरीश महेता को समज में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे.. एक पत्रकार परिषद में उनके वकील ने बताया है कि कोर्ट के फैसले से महेता परिवार बहुत निराश है..फिर भी उन्होने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की बात अभी की नहीं है......

हमारे सब के मन मे यह सवाल बारी बारी उठता है कि अगर निकिता ने न्याय के लिए कोर्ट का आशरा न लिया होता और कोई निजी क्लिनिक में जाकर अपना गर्भपात करवा लिया होता तो ? आखिर वह कोर्ट में क्यों गई ?

शायद उसे भारत की न्यायप्रणाली पर पूरा विश्वास था... और होना भी चाहिए... क्योंकि हम सब भारतवासी है... लेकिन शायद यहाँ पर न्याय मिलने में थोड़ी चूँक हो गई... अब निकिता का वही रोगग्रस्त बच्चा इस दुनिया में जन्म लेगा... क्या पता हो सकता है कि उसकी यहीं सतान भविष्य में देश की एक बड़ी हस्ती बनकर बहार आए........


खैर वह तो भविष्य की बात है वर्तमान में तो डाक्टरो ने कह दिया है कि वह आजीवन कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित रहेगा...एक माँ अपनी ही संतान को आजीवन कोई गंभीर बीमारी से झूझते देखेगी... आखिर करे तो भी क्या करे एक माँ... ........

( दोस्तो क्यां मुंबई हाईकोर्ट का यह फैसला सही है ? क्या निकिता कानून का सहारा न लेकर कोई निजी क्लिनिक में जाकर गर्भपात करवाती तो वह सही रहेता ? आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे... जनक नाम तो याद रहेगा शायद ) ........

प्रतिक्रियाएँ

Re: आखिर क्या करे एक माँ ?
मुंबई हाईकोर्ट का यह फैसला एक दम सही है! यदि यह बच्चा ठीक पैदा होता और बाद में किसी दुर्घटना वश अपाहिज हो जाता तो क्या यह माता पिता उस को मारने के लिये अदालत से इजाज़त लेते? और दुनिया का सब से बडा वैज्ञानिक, tephen William Hawking, पूर्णतः अपाहिज है!
Re: आखिर क्या करे एक माँ ?
निकिता बच्चे को जन्म दे, वो भ्रूण हत्या न करवाए. भ्रूण हत्या के साइड अफैक्टस भी होते हैं, कहीं निकिता की कोख ताउम्र के लिए भर ही न सके... यह एक चुनौती है, लेकिन निकिता को पार पाना होगा..
Re: आखिर क्या करे एक माँ ?
nikitane sabkuchh iswar par chhod dena chahiy, agar kanoon ne faisla diya hai ki vo is bachhce ko janm de to aage jake bachhe ko koi taklif hui to vo madad ke liye guhar phi laga sakti hai... carry on nikita....god helps you.....
Re: आखिर क्या करे एक माँ ?
dear janaksing. good stroy.. keep it up...
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