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कुछ तो गलत हुआ है !

'जब बच्चा स्कूल में होमवर्क नहीं करता तब वह शिक्षक के सामने कई बहाने करता है... लेकिन उसको मालूम नहीं रहता कि शिक्षक सब कुछ जानता है.... '

हमारी मध्यप्रदेश पुलिस भी शायद अपना होमवर्क ठीक से नहीं कर पाई इसलिए तो उसने छिंदवाडा के संत आसाराम गुरुकुल में हुई दो मासूमो की हत्या के पीछे एक चौदह साल के मासूम छात्र को कसूरवार ठहराया है...

पुलिस शायद जानती नहीं है कि यहाँ पर शिक्षक के रुप में पूरे देश की जनता है...जो जानती है कि इस मामले में कुछ गलत हुआ है.. जनता जानती है कि शायद मध्य प्रदेश पुलिस कोई दवाब में है... या फिर पुलिस किसी को बचाने का प्रयास कर रही है... इसलिए तो उसने पूरे मामले की अधुरी जांच करके आननफानन एक मासूम को ही इस घटना का मुख्य दोषी ठहराया है...


कत्ल की गुथ्थी सुलजाने का दावा करने वाली पुलिस छाती ठोक कर कह रही है कि कत्ल करने वाला ऋतुराज कोई मानसिक रोग से पीडित है... वैसे देखा जाए तो अभी तक 'उस बच्चे की कोई मानसिक जाँच कि गई नहीं है... सिर्फ जबलपुर और भौपाल से आए चिकित्सकोने अपनी और से थोड़ा बहुत काम किया है... अरे अभी तो दोनो मृतक बच्चो की फोरेन्सिक रिपोर्ट भी नहीं आई है और उससे पहले ही पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया है... सच में क्यां कार्य प्रणाली है यहाँ कि पुलिस की...

पुलिस कहती है कि आसाराम गुरुकुल का नौवी कक्षा में पढ़ने वाला ऋतुराज ही दोनो बच्चो का हत्यारा है... उसने 15 दिन पहले ही गुरुकुल में दाखिला लिया था.... उसे शुरू से ही यहाँ पर रहना पसंद नहीं था...उसे यहाँ का खाना भी बिलकुल पसंद नहीं था.. वह यह गुरुकुल छोडना चाहता था.. लेकिन उसे कोई ठोस कारन नहीं मिल रहा था...उसी दौरान उसको अहमदावाद के आसाराम गुरुकुल में हुई दो बच्चो की हत्या की बात जानने को मिली... उसने सौचा कि शायद में भी इस आश्रम में दो बच्चो की हत्या कर दु तो आश्रम हमेशा हमेशा के लिए बंध हो जाएंगा और में खुशी खुशी अपने घर चला जाउगां.. ......

दोस्तो पढ़ा अपने पुलिस ने क्या बताया..हम सभी जानते है कि छिंदवाडा आश्रम के बाथरुम में रामकृष्ण और वेंदात नाम के दो बच्चो की हत्या हुई..उस हत्या को देखकर हमे लगता है कि यह काम कोई बड़ा आदमी ही कर सकता है.. आखिर एक छोटा बच्चा मुँह और नाक दबकर एक के बाद एक दो बच्चो की हत्या कैसे कर सकता है...

ऋतुराज के परिजन भी कहते है कि उसके बच्चे को पुलिस गलत तरीके से फसा रही है..बच्चे के पिता कहते है कि जब वेदांत की हत्या हुई तब ऋतुराज उसी बाथरुम के निकट के शौचालय में शौच करने गया था..उसने वहाँ पर थोडी आवाज भी सुनी..जब वह बाहर आया तो निकट के बाथरुम में वेदांत का आधा सिर पानी की बाल्टी में डूबा पड़ा था.. उसने सौचा वेदांत पानी गंदा कर रहाँ है..उसने वेदांत को डाटा और जब उसका सिर बाहर निकाला तो वह मर चूका था.. ......


छिंदवाडा के आईजी एम आर कृष्णा कहते है कि हत्यारे ने वेदांत के शरीर पर अपने दाँत गडाए थे... उसकी पीठ पर भी दाँतो के निशान थे...अब आप ही बताए अगर कोई किसी के हाथ और शरीर पर दाँत गडाए तो सामने वाला शख्स शांत बैठा रहेगा...उसके मुँह से कोई भी चिख नहीं निकलेगी.....

मान लो वह चिल्लाया भी होगा तो क्यों आश्रम प्रबंधन के एक भी अधिकारी ने उसकी चीख नहीं सुनी... क्यां पूरा प्रबंधन उस वक्त सो रहा था...जब एक के बाद एक कर के दो मासूमो की हत्या एक ही बाथरुम में महज 36 घंटो के अंतराल में हो गई... यह वही प्रबंधन है जो इस पूरे मामले के पीछे किसी शैतानी शक्ति का हाथ बता रहाँ था....दोस्तो यहाँ पर दु:ख के साथ बताना चाँहूंगा कि कि इस पूरे मामले में आश्रम प्रबंधन का कोई दोष सामने नहीं आया है.. ...

इस मामले की जाँच कर रही मध्यप्रदेश पुलिस के संबंधित अधिकारीओ को आखिर में मे कहेना चाँहूंगा कि सिर्फ शक के आधार पर किसी मासूम को हत्यारा साबित करना और बाद में एक पत्रकार परिषद कर लेना कोई बहादूरी का काम नहीं है... आप इस मामले की जड तक जाए... उस आरोपी लड़के की मनोचिकित्सकी जाँच करवाए...फोरेन्सिक रिपोर्ट लोगो के सामने रखे... वरना आपका होमवर्क आधाँ ही रहेगा... और आप को शिक्षक (जनता) के कई सवालो का जवाब देना पड़ेगा........

(दोस्तो में आपसे प्रत्यक्ष पूछना चाहता हू क्यां आपको लगता है कि इस घटना में गुरुकुल का छात्र ही हत्यारा हो सकता है.. क्यां आप को नहीं लगता कि पुलिस एक निर्दोष मासूम को फसा रही है... दूसरी और स्वयं आसाराम ने भी कहाँ है कि अगर वह इस पूरे मामले में दोषी साबित होते है तो वह सुली पर लटकने के लिए भी तैयार है... क्यां पुलिस सच में किसी के दबाव में रहकर यह कार्य कर रही है... या फिर सही आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है...अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भैजे... यह किसी मासूम की जिंदगी का सवाल हो सकता है... जनक...नाम तो याद रहेगा शायद)

प्रतिक्रियाएँ

Re: कुछ तो गलत हुआ है !
आखिर एक छोटा बच्चा मुँह और नाक दबकर एक के बाद एक दो बच्चो की हत्या कैसे कर सकता है... आख़िर क्यों नहीं कर सकता? क्या आपने 'छोटा बच्चा' कहा? अपने पड़ोस के किसी स्कूल के नर्सरी/केजी के बच्चों को देखने निकल पड़िये, वहीं चौदह साल के आठवीं या नौवी के लड़कों के साथ उनकी तुलना कीजिये. पता चल जाएगा की कौन बच्चा है और कौन 'छोटा बच्चा'. शायद आप चौदह की उम्र में कद काठी में 'नर्सरी के छोटे बच्चे' रहे होंगे. ब आप ही बताए अगर कोई किसी के हाथ और शरीर पर दाँत गडाए तो सामने वाला शख्स शांत बैठा रहेगा...उसके मुँह से कोई भी चिख नहीं निकलेगी..... किसी का सर जबरजस्ती पानी में पूरा डुबाया गया हो तो तो वह चीखेगा कैसे? आप पानी में डुबकी मारें और अन्दर से चीखने की कोशिश करें..... देखते हैं कितने आसपास वाले चीख सुन पाते हैं. आपने शायद फोरेंसिक साइंस का होमवर्क बड़ी मेहनत से किया था, तभी इतनी सामान्य सी बात पर अपना अकाट्य तर्क दे बैठे! (आजकल हर ऐरा गैरा नौसिखिया भी विज्ञान की गूढ़ शाखाओं को जेब में लिए घूमता है). हे फोरेंसिक विज्ञान के महाज्ञानी! पहले रिपोर्ट वगैरह आ जाने दो(जो की हफ्ते/ पखवाड़े में आ ही जायेगी) फ़िर उसकी तकनिकी खामियों की बाल की खाल निकलना. देखते हैं कितनी उधेड़ पाते हो. बिना देखे ही बौद्धिक दस्त शुरू कर दिए! और जबकि दिमाग में कुछ गूदा/गोबर तक नहीं है तो भी? और जहाँ तक मानसिक रोगी होने की बात है, ऐसा तो है नहीं की उसे किसी भी डॉक्टर ने नहीं देखा. एक दो ने देखा है बाकि जल्द ही विशेषज्ञों द्वारा भी स्क्रीनिंग हो जायेगी. आसाराम की दुकान बंद होनी ही चाहिए पर जो इसका गुनाहगार है उसको आसाराम के jurmon की आड़ में नहीं बचाया जाना चाहिए.
Re: कुछ तो गलत हुआ है !
Ye sahi hai, Koi chhota bachcha ye kaam nahi kar sakta, Isme Aasharam ke kisi Anya Vyakti ka haath ho sakta hai. Kyunki, koi bachcha is tarah ki hatya ko anzaam nahi de sakta. Ye kaam kisi Shaatir vyakti ka hai. Aur Police ko iske liye Apni sahi tehqiqat jaari rakhni chahiye.
अस्वीकरण