मैं बात कर रहाँ हू यश व्यास की.. जिस की उम्र सिर्फ नौ साल है... उसे आतंकवाद का अर्थ भी मालूम नहीं लेकिन फिर भी वह आज अस्पताल मे है...
वह पूरी तरह बिमार है...
शनिवार को अहमदाबाद में हुए धमाको का शिकार वह भी बना है..
इस धमाको ने यश के सिर पर से अपने पिता का साया हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया... यश का बड़ा भाई रोहित (उम्र 12) भी आज जिंदगी और मौत के बीच अपनी लड़ाई लड़ रहा है...
किसी को मालूम नहीं था कि व्यास परिवार की खुशी सिर्फ एक ही पल में छीन जाएंगी.. सिविल अस्पताल के केंसर विभाग में काम करने वाले यश के पिता दुश्यंत व्यास ने अपने बच्चो को नई साईकल खरीदकर दी थी...
उस शाम वह दौनो भाई साईकिल की खुद सवारी करना चाहते थे...दुश्यंत बच्चो की जिद के सामने कुछ भी नहीं बोल पाए और दोनो को साईकिल की सवारी करने के लिए बहार ले गए...
साईकिल पर जैसे ही दोनो अस्पताल के प्रांगन से थोड़े दूर गये होगे कि अचानक ही वहा पर एक जोरदार धमाका हुआ... जिसमें घटनास्थल पर ही दुश्यंत व्यास की मृत्यु हो गई... यश का बड़ा भाई रोहित इस धमाके में पूरी तरह झुलस गया... उनकी नई साईकल के तो इस धमाके में चीथड़े उड़ गए...
दोनो भाईओ की एक बहन भी है...जिसका नाम नेहा है... उनकी मा बारी बारी अस्पताल के सभी डोक्टरो के हाथ जोड़कर अपने बैटो की जिंदगी की भीख मांग रही है...इस दुर्घटना में वह अपने पति को तो पहले से गँवा चू की है...अब अपने बेटों को गँवाना नहीं चाहती.....
(आखिर आतंकवादी हमे कब तक मारते रहेंगे ? क्यां करना चाहिए ऎसे लोगो का ? .जो बिना बजह मासूम लोगो की जान ले रहे है... अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे... कृपया हिंदी सुधारके पढ़े.. जनक...नाम तो याद रहेगा शायद)
Courtesy: TOI

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