अहमदावाद में शनिवार को हुए धमाको ने एक डाक्टर के पिता बनने के सपने को चकनाचूर कर दिया... जब डा. प्रेरक अपनी सगर्भा पत्नी को लेकर चेक अप के लिए सिविल अस्पताल गए तभी उन्हे धमाको की खबर मिली...
प्रेरक ने उस समय घर वापस जाना मुनासिफ समझा.. लेकिन वह नहीं जानते थे कि एक और धमाका मौत का सामान लेकर उनका इंतजार कर रहा है...
प्रेरक अहमदावाद के मोडासा में रहते थे... उनकी किंजल के साथ दो साल पहले ही शादी हुई थी... किंजल के पेट में तीन माह का बच्चा था...
उस दिन उन्होने अपना वाहन पार्किग में रखा..जब वह ट्रूमा सेन्टर की तरफ रवाना हुए... तभी वहा पर एक जोरदार धमाका हुआ... उस धमाके में घटनास्थल पर ही किंजल की मौत हो गई..
प्रेरक को अस्पताल में लाया गया...वह 20 मिनिट तक एक भी लब्ज बौल नहीं पाया...
'डोक्टरो ने उसे बचाने का बहुत प्रयत्न किया... लेकिन शायद प्रेरक किंजल के पास जाना चाहता था... थोड़ी देर में ही उसकी सांस थम गई...
(आखिर आतंकवादी हमे कब तक मारते रहेंगे ? क्यां करना चाहिए ऎसे लोगो का ? .जो बिना बजह मासूम लोगो की जान ले रहे है... अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे... कृपया हिंदी सुधारके पढ़े.. जनक...नाम तो याद रहेगा शायद)
Courtesy: TOI

लोड हो रहा है...
प्रतिक्रियाएँ