ब सिविल अस्पताल से मिले एक सिर से सब लोग यह मानने लगे थे कि इस घटना में कोई मानव बम भी शामिल है लेकिन अब इस मृतदेह की पहचान हो चूकी है... यह मृतदेह 45 वर्षीय पुरुषोतम भाई पटेल का है जो एक वीमा एजन्सी में काम करते थे..पुरूषोतम भाई उस दिन सिविल अस्पाताल के सर्जीकल वार्ड में काम करने वाली अपनी पत्नी चंपा बेन को टीफिन पहूचाने गए थे... चंपा बहन वहाँ पर दोपहर 2 बजे से रात को 10 बजे तक काम करती है... पुरुषोतम भाई हर दिन अपनी पत्नी को रात का खाना पहुचाने जाते थे...
उस दिन भी उनके साथ उनका पोता रोहन (10) और पोती श्रद्धा (7) भी थे जो अपनी दादी को देखने जा रहे थे.. शायद उन बच्चो को मालूम नहीं था कि वह दिन उनके जीवन आखिरी दिन होगा...सीविल अस्पताल के ट्रामा सेन्टर में हुए उस जबरदस्त धमाके ने तीनो की जान ले ली... पुरुषोतम भाई का तो सिर धड़ से अलग हो गया...और लोग उन्हे मानव बम मानने लगे...कई अखबारो ने भी उन्हे आत्मघाती हमलावर बताया लेकिन बाद में इस बात की पुष्टि हुई की मरनेवाला इंसान तो एक निर्दोष शख्स था...
24 घंटे के बाद तीनो के मृतदेह इसी अस्पताल के पोस्ट मार्टम रूम में रखे गये थे... उनके मृतदेह पूरी तरह क्षतविक्षिप्त हो गए थे...जिन्हे एक बैग में भरकर स्ट्रेचर के जरिये यहा पर लाया गया था...
दु:ख की बात यह है कि इसी पोस्ट मार्टम रुम में पूरुषोतम भाई का भतीजा पंकज भी काम करता है...जिस ने अपने ही रिश्तेदारो के क्षतविक्षिप्त मृतदेहो को देखा और उन्हे अंतेष्ठि तक संभालकर रखा... आज पूरा पटेल परिवार शौक में मग्न है... लेकिन उन्हे सिर्फ एक ही बात का अफसौस है कि उनके घर के मुखिया को सभी लोग एक आत्मघाती हमलावर मान रहै है...
उनके पास हर दिन कई अखबार वाले और टीवी चेनल वाले आते है और पूरुषोतम भाई के चरित्र लेकर उनसे तरह तरह के सवाल पूछते रहते है...शायद अब मीड़िया को भी इस परिवार को कलंकित होने से बक्स देना चाहिए... जिसने अपने ही घर से तीन लोगो को गँवाया है...
(आखिर आतंकवादी हमे कब तक मारते रहेंगे ? क्यां करना चाहिए ऎसे लोगो का ? .जो बिना बजह मासूम लोगो की जान ले रहे है... अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे... कृपया हिंदी सुधारके पढ़े.. जनक...नाम तो याद रहेगा शायद)
Courtesy: TOI

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