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28 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (4)
कौन भूल सकता है...आंतकवाद का वह कहर जिसने कई मासूमो की जान ली... इस आतंकवाद के शिकार छोटे फरिश्ते भी बने...जिन्हे आतंकवाद का मतलब क्यां होता है वह भी मालूम नही... मैं बात कर रहाँ हू यश व्यास की.. जिस की उम्र सिर्फ नौ साल है... उसे आतंकवाद का अर्थ भी मालूम ... आगे पढ़ें...

वह दोनो अपने आने वाले बच्चे का इंतजार नहीं कर पाए... क्योंकि आतंकवादियो की उस धीनोनी करतूत ने उन्हे यह करने नहीं दिया...अहमदावाद में शनिवार को हुए धमाको ने एक डाक्टर के पिता बनने के सपने को चकनाचूर कर दिया... जब डा. प्रेरक अपनी सगर्भा पत्नी को लेकर चेक ... आगे पढ़ें...

शनिवार को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में हुए जबरदस्त धमाको के पीछे कोई आत्मघाती हमलावर नहीं था...यह बात तब सामने आई थी जब सिविल अस्पताल से मिले एक सिर से सब लोग यह मानने लगे थे कि इस घटना में कोई मानव बम भी शामिल है लेकिन अब इस मृतदेह की पहचान हो चूकी ... आगे पढ़ें...