
मुज्जफ्फर शेख की उर्म सिर्फ तीन साल होगी जब वह अपने परिवार से बीछड़ गया... में बात कर रहाँ हू वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगो की... इस दंगो में कई लोग मारे गये और कही लोग लापत्ता हो गए...मुज्जफ्फर उन 450 गूम बच्चो में से एक था जिनका आज भी कोई पत्ता नही...
28 फरवरी 2002 के दिन कांग्रेस के विधायक मरहूम अहसान जाफरी के घर से मुज्जफ्फर लापत्ता हो गया था... उस समय दंगो के हालात देखकर मुज्जफ्फर के पिता सलीम और मा जेबुनिसा जाफरी के पास आश्रय लेने गये थे...अचानक ही वहाँ पर दंगाकर्मी आ गए और भगदोड़ मच गई...इस बीच मुज्जफ्फर अपने मा-बाप से अलग हो गया...
प्रवीण पाटनी नाम के एक पुलिस कोन्टेबल को यह बच्चा मिला... उसने मुज्जफ्फर को किशोर न्यायालय या अनाथाश्रम में भेजने बदले अपने एक रिश्तेदार विक्रम और मीना पटनी को सौंप दिया..जो अहमदाबाद के सरसपुर विस्तार में रहते थे..
आज मुज्जफ्फर अपनी असली पहचान गवाँ चूका है.. मुज्जफर मुज्जफ्फर न रह कर विवेक बन गया है... क्योंकि एक हिन्दू परिवार पीछले छह साल से उसको पालपोष रहाँ है...
नौ साल का यह मुज्जफ्फर उस समय विकट परिस्थिति में आ गया जब उसके असली माता पिता उसके सामने आ गए.. उसे बताया गया कि उसको पालने वाली माँ दरसल उसकी असली माँ नहीं है..लेकिन भला वह यह बात केसे मान सकता था ? वह तो अपनी मौजूदा माँ को ही जानता है..और उसकी माँ भी अब उसे अपने असली माता-पिता को सोपना नहीँ चाहती....
जब विवाद बढ़ गया तो बात पुलिस और कोर्ट तक जाँ पहूची... असली माता-पिता का डीएनए टेस्ट लिया गया..जो सही साबित हुआ... फिर भी कोर्ट ने मुज्जफ्फर को उसके असली माता-पिता के पास नहीँ सौपा...
आज उसकी मा जेबुनिसा रो-रो कर अपने बच्चे को हाँसिल करने के लिये गुहार लगा रही है..वह अपने बच्चे को हाँसिल करने के लिए सुप्रिम कोर्ट में भी जाने को तैयार है.......
सामाजिक संस्थाए भी आगे आई...
मुज्जफ्फर को अपने असली मा-बाप को सौंपने के लिए कई सामाजिक संस्थाए भी अब आगे आई है...

सामाजिक कार्यकार्ता तिस्ता सितलवाड भी इस मामले को गंभीर रुप से ले रही है... वह कहती है कि ' हमने गुजरात पुलिस और विशेष जाँच दल पर भरोसा किया लेकिन उन्होने हमारे साथ विश्वासघात किया है... हम इस मामले को हाईकोर्ट तक लेकर जाएंगे'
पूरे मामले में पुलिस दोषी..
गुजरात काउन्सिल के अधिकारी का कहना है कि आखिर पुलिस ने बच्चे को कोई किशोर न्यायालय क्यों नहीं भेजा...उसे क्यों किसी और को सोंप दिया गया...हमारा कानून कभी भी इस बात की मंजूरी नहीं देता..
गुजरात में वर्ष 2002 में दंगो के दौरान ऎसे कई परिवार है जिनके यहाँ से कोई मरा है या फिर कोई गूम हुआ है... क्यां मुज्जफ्फर उर्फे विवेक को उसके असली मा-बाप को सौप देना चाहिए...अगर हा तो उस मा का क्यां होगा जिसने छ साल तक उसे पाल पोषकर बड़ा किया है... जिस के पास खुद विवेक रहना चाँहता है...यह स्थिति दैवकी और यशोदा जैसी है... आप ही बताए जन्म देने वाली माँ बड़ी या फिर पालने वाली...
(कृपया हिंदी सुधारके पढ़े और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे..जनक....नाम तो याद रहेगा शायद )

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