दोस्तो आप बताइए अगर पांच फूट लंबी और दो इंच चौडी लोहे की रोड़ आप के बदन के आरपार हो जाए तो क्यां आप जिंदा रह सकते है... लेकिन शायद भगवान ने दिल्ली में रहने वाले सुप्रतीम को दूसरा जन्म दिया है...
गुडगाँव के रास्ते 12 जुलाई को एससीएल कंपनी के एक्सीक्युटीव सुप्रतीम अपनी ऑफिस कार से काम पर जा रहा था... अचानक कार के ड्राईवर का कार पर काबू न रहा और देखते ही देखते एक बड़ी दुर्घटना हो गई..
इस हादसे में एक लोहे की बड़ी रोड़ सुप्रीतम के बदन के आरपार हो गई...जय प्रकाश नारायन एपेक्स ट्रुमा सेन्टर (एम्स) के डाक्टर्स ने उसका 6 घंटे तक ऑपरेशन किया...और अंत में सुप्रतीम को एक नया जिवन मिला...
आप को ताज्जुब होगा लेकिन वह दिन सुप्रतीम का आफिस का आखरी दिन था...वह अगले महिने कोई नई कंपनी में जुड़्ने वाले थे... वह ऑफिस में अपने दोस्तो से आखरी बार मिलने जा रहा था...
सुप्रतीम कुछ ज्यादा नहीं बोल पाया लेकिन उसके पिता सुकुमार दत्ता ने पत्रकारो को बताया कि कार का ड्राइवर आधा नींद में था... उन्होने बताया कि एचसीएल ने हमारी बहुत मदद की...
हादसे के आंधे घंटे तक सुप्रतीम उसी परिस्थिति में कार में बेठा रहा... उसने फोन कर करके अपने माता-पिता और दोस्तो को अपनी हालत के बारे में सूचित किया.....
करीबन 6.30 मिनिट पर सुप्रीतम की मा रुबीना नें उसका फोन उठाया... उस समय सुकुमार घर पर नहीं थे...वह अपने पडोशी के साथ घटनास्थल पर पहुच गई..
मा को देखकर सुप्रतीम ने कहा '' मम्मी मेरी मदद करो..मेरे साथ दुर्घटना हो गई...एक लोहे की रोड़ मेरे शरीर के आरपार हो गई है...
रुबीना कहती है कि एक पल के लिए मुझे विश्वास ही नही हुआ कि सुप्रतीम क्यां बोल रहा है.. हम वहा पर मोजूद दूसरे लोगो की मदद से उस अस्पताल ले गए...वहा पर उसका ऑपरेशन हुआ..और भगवान ने मेरे बेटे को बचा लिया... .....
दोस्तो क्यां इसे हम कोई कुदरती करिश्मा या चमत्कार नही कह सकते ? अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे...
( कृपया हिन्दी सुधारके पढ़े... जनक... नाम तो याद रहेगा शायद...)
Courtesy : Times Of India

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