आगे चलकर उन्होने रेगिस्तान में एक तालाब ढूँढ लिया...जहाँ पर नहाने के लिए दोनो दोस्त गए..पानी गहरा था... अचानक दूसरा दोस्त डूबने लगा...
लेकिन चाँटा मारने वाले पहले दोस्त ने उसको बचा लिया... अपनी जान बचाने के लिए उसने इस बार एक पथ्थर पर लिखा कि '' आज मेरे दोस्त ने मेरी जान बचाई है...वह मेरा पक्का दोस्त है''
जिसने चाँटा मारा था वह उसके पास आया और बोला कि मेने जब तुम्हे थप्पड मारा तब तुमने रेत पर लिखा था और आज जब मेने तुम्हारी जान बचाई तब तुम उस बात को पथ्थर पर लिख रहे हो. एसा क्यों ?
दूसरे दोस्त ने कहाँ '' जब हमारा कोई अपमान करता है या फिर हमे कोई चोट पहुँचाता है तो उस बात को हमे रेत पर लिखना चाहीए क्योंकि हवा का कोई तेज झोका उस बात को ले उड़ेगा..वह बात हमारे दिभाग से निकल जाएगी.. लेकिन जब कोई हमारे लिए अच्छा काम करे तो वह बात हमे हमेशा संभाल कर पथ्थर पर लिखनी चाहिए...ता कि कोई भी तेज हवा उसे मिटा न शके.. वह हमेशा हमारे दिल-दिमाग में सही सलामत रहेगी...
जनु की जुबानी
मेरे भी कई दोस्त कभी-कभी मेरी बूराई करते रहते है.. वह मेरी पीठ के पीछे रहकर बूराई करते है... ..में चाँहू तो उसका जवाब दे शकता हू... लेकिन क्यां फायदा..घर के पास तो कुत्ते भी भोकते रहते है... वह अपने आपको शेर कहते है ..मियाँ... शेर कभी भी पीछे से वार नहीं करता....आगे आओ...
खैर में उस बात को रेत पर लिख देता हू... क्योंकि रेत पर लिखने से मेरा ही फायदा है... आप भी जब कभी किसी व्यक्ति के द्रारा किसी बात को लेकर परेशान हो तब प्लीस उस बात को रेत पर लिखियेगा....देखना आप को बहुत मजा आएगा...
कृपया मेरी हिन्दी सुधारके पढ़े... और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे.. जनक..नाम तो याद रहेगा शायद...

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