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हम-तुम

तुम : क्या रो रहे हो तुम ?

हम : नहीं तो...

तुम : तुम्हारा यह चेहरा बता रहा है.

हम : अच्छा अब तुम मेरे दिल के भेद भी जानने लगी हो.... कुछ नहीं यूं ही किसी की याद आ गई...

तुम : किस की याद आ गई ?

हम : जो मेरे सपनो में रहती है..जिसका साया आज भी मेरे आसपास मंडराता रहता है. जो चुपके से मेरे ख्यालों के आंगन में आ जाती है...और.....

तुम : और क्या.... ?

हम : और... हमेशा साथ रहेना का वादा करके चली जाती है...

तुम : अगर वह साथ रहने का वादा करती है तो फिर चली क्यों जाती है....

हम : वह जाती जरूर है...लेकिन अपना दिल मेरे पास छोड़कर चली जाती है. जब कभी भी मेरे आँखें भर आती है. तब इस दिल से आवाज आती है...तुम क्यों रो रहे हो...मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं...और हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी...

तुम : क्या वो तुमसे बहुत प्यार करती है ?

हम : अपनी जान से भी ज्यादा...

तुम : कौन है वो....?

हम : उसकी तारीफ में कैसे करूं...जिसके साथ मेरा जन्मों से नाता है...जिसके सपनों में आने से मेरे सपने सुनहरे बन जाते हैं...जो मेरी जिंदगी है...

तुम : बहुत हो गई तारीफ... अब उसका नाम बताओ ...?

हम : मैं क्यों बताऊं ?

तुम : न बताना चाहो तो चुल्लू भर पानी में डूब जाओ...मंजनू....मैं तो जा रही हूं ( वह चली जाती है )

हम : आखिर तुम्हे कैसे बताऊं कि वह तुम्ही तो हो....
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