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किसान और पिल्ले

गाँव के उस किसान के पास कहीं सारे पिल्ले थे... उसने उस पिल्लो को बेचने का सौचा...उसके लिए उसने एक बडा लकडी का बोर्ड बनवाया...जिस पर लिखा था... '' पिल्ले यहाँ से मिलेंगे''.


दिन ढल जाने तक कोई भी शख्स पिल्ले खरीदने नहीं आया... किसान बहुत निराश होकर खडा था...

अचानक पीछे से किसी ने उसकी कमीज खींची...जब उसने पीछे मुडकर देखा तो एक बहुत छोटा लडका उसे बुला रहा था...



उसने किसान से कहाँ... '' भैया मुझे एक पिल्ला खरीदना है''

''किसान ने कहाँ ''ठीक है... उसने उस लडके को पिल्ले दिखाये...जो दिखने में बहुत ही सुंदर थे...जिनकी किमत भी बहुत ज्यादा थी ''


लडका एक मिनिट के लिए कुछ सौचने लगा...बाद में उसने जेब में अपना एक हाथ डाला... उसके पास सिर्फ पचास रुपैये थे''

'' भैया क्याँ पचास रुपैये में मुझे कोई पिल्ला मिल सकेगां ''

'' क्यों नहीं...इस पिंजरे में कही सारे पिल्ले है...तुम्हे जो चाहिए वह पसंद कर लो ''


पिंजरे में कहीं सारे पिल्ले थे जो आपस में खेल रहे थे... लेकिन एक पिल्ला बिलकुल शांत था...और कोने में बेठा था...''

लडके ने कहाँ मुझे वही पिल्ला चाहिए जो कोने में बेठा है ''


'' लेकिन बेटे क्यां तुम्हे मालूम है... वह पिल्ला कौने में क्यों बेठा है... क्योंकि उसका एक पैर नहीं है... वह अपाहिज है.. वह ठीक से चल भी नहीं सकता... उसके साथ तुम कैसे खेल सकोंगे ''

''वह लडका तीन-चार कदम पीछे हटा......
किसान ने देखा की उस लडके का भी एक पैर नहीं था.

लडका बोला '' भैया मेरा भी एक पैर नहीं है.... मेरे दोस्त हमेशा खेल-कूद करते रहते है..और में इस पिल्ले की तरह हर-दिन किसी कोने में बेठकर उनको देखता रहता हुँ...में ठीक से दोड भी नहीं सकता...

अगर मेरा यह नया दोस्त मेरे साथ रहाँ तो हम दोनो हमेशा एक दूसरे को देखकर अपना-अपना दर्द बाट लिया करेंगे...उसको भी कोई ऎसा चाँहिए जो उसे समझ सके...



जनु की झुबानी

The world is full of people who need someone who understands.

(आप को यह प्रेरणास्पद कथा कैसी लगी अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे.... जनक नाम तो याद रहेगा शायद)

प्रतिक्रियाएँ

Re: किसान और पिल्ले
बहुत ही प्रेरनास्पद लघु कथा है, ज़िंदगी की हकीकत और जरूरत दोनो ही
अस्वीकरण