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जुलाई 2008


ब्लॉग्स (18)
अमान मियाँ कुछ ऎसे चुनिदा स्टेशनो को देखो जिसके पास अस्पताल हो... क्यों ? स्टेशन पर बम फटेंगे और घायल एकाद घंटे में अस्पताल पहुँच जाएंगे और वहा फिर एक बड़ा धमाका होगा जिसमें एक साथ सभी मर जाएंगे.. रामगोपाल वर्मा की हालिया रिलीज फिल्म कोंट्रेक्ट का यह ... आगे पढ़ें...

कौन भूल सकता है...आंतकवाद का वह कहर जिसने कई मासूमो की जान ली... इस आतंकवाद के शिकार छोटे फरिश्ते भी बने...जिन्हे आतंकवाद का मतलब क्यां होता है वह भी मालूम नही... मैं बात कर रहाँ हू यश व्यास की.. जिस की उम्र सिर्फ नौ साल है... उसे आतंकवाद का अर्थ भी मालूम ... आगे पढ़ें...

वह दोनो अपने आने वाले बच्चे का इंतजार नहीं कर पाए... क्योंकि आतंकवादियो की उस धीनोनी करतूत ने उन्हे यह करने नहीं दिया...अहमदावाद में शनिवार को हुए धमाको ने एक डाक्टर के पिता बनने के सपने को चकनाचूर कर दिया... जब डा. प्रेरक अपनी सगर्भा पत्नी को लेकर चेक ... आगे पढ़ें...