
''मम्मी-पापा अब में घर आ रहा हुँ लेकिन क्यां में अपने साथ अपने प्यारे दोस्त को ला शकता हुँ वह भी आपको मिलने के लिए बेताब है''
'' क्यों नहीं बेटा तुम उसे जरुर ला शकते हो आखिर वो भी हमारे बेटे जैसा ही तो है..''
'' मम्मी-पापा लेकिन उसके बारे में मे एक बात आपको बताना चाहुंगा... युद्ध के दौरान वह पूरी तरह घायल हो गया था...उसने दुश्मनो का डटकर सामना किया... लेकिन पूरी तरह जख्मी होने के बाद उसे अपना एक हाथ और एक पैर गवाना पडा... वह कहीं भी नहीं जा शकता...में चाहता हुँ कि हम उसे अपने साथ रखे. इस नेक काम में आपका सहयोग चाँहता हुँ.''
'' बेटे सुनकर बहुत दु:ख हुआ.. हम उसका कहीँ और घर ढूँढने में तुम्हारा सहयोग करेंगे.''
'' नहीँ मम्मी-पापा में चाँहता हुँ कि वह हमारे साथ ही रहे''
उसके पिता ने कहाँ '' बेटे तु जानता नही कि तु क्यां बोल रहाँ है..हम इस अपाहिज लडके को अपने साथ केसे रख शकते है...वो हम पर और हमारे घर पर बोज बनकर रहेंगा.. हमारी भी अपनी एक जिंदगी है.. और हम नहीं चाँहते कि हमारे जीवन में कोई हस्तक्षेप करे... मेरा मानना है कि तुम्हे अपने लंगडे दोस्त को भूल जाना चाहिए और जल्द ही घर आ जाना चाहिए... वह अपना रास्ता खुद ढूँढ लेंगा..तुम्हे फिर्क करने की कोई जरुरत नहीँ...''
उसी समय लड्के ने फोन काट दिया... उसके माता-पिता उसके द्रारा बोला गया और कोई शब्द नहीं सुन पाए...
थोडे दिनो पश्वात उन्हे सीमा पर तैनात एक चौकी से फोन आया... उन लोगो को पानी में से एक नौजवान की लाश मिली थी.. पुलिस ने माना कि उसने आत्महत्या की थी... वह लाश लम्बे समय तक पानी में रहने के कारन पूरी तरह सड चुँकी थी.. इस लिए उन्होने लंबी छानबीन के बाद उसकी शिनाख्त के लिए उस नौजवान के माता-पिता को बुलाया था..
उसके मा-बाप भी सोच रहे थे कि आखिर उनका बेटा आत्महत्या क्यों करे.. फिर भी वह लाश की शिनाख्त करने के लिए दोडते-भागते वहाँ पहुंच गए.. उन्होने अपने बेटे की लाश को पहचान लिया...उन्होने वहाँ पर एक चीज और भी देखी वह यह कि उसके बेटे का एक हाथ और एक पैर नहीं था...जिसे देख कर वह फुट फुट कर रोने लगे...
जनु की झुबानी
इस कथा में जैसा स्वभाव उस लडके के माता-पिता का है वैसा ही मिलता जुलता स्वभाव हमारा है...हम हमेशा उनको ज्यादा प्यार करते है..जो हमारे आसपास रहता है..

जो दिखने में अच्छा है और जो हमे हमेशा हसाता रहता है.. लेकिन हमे ऎसे लोग बिलकुल भी पसंद नहीं जो हम पर बोज बने रहते है...जो शारीरिक और मानसिक तौर पर विकलांग है ऎसे लोगो से हम हमेशा दूरी बनाए रखते है....
अगर इस कहानी से आपको कोई प्रेरणा मिलती है तो आईए मेरे साथ आज एक वादा कीजीए की आज रात जब आप सोने जाओंगे तब दो हाथ जोडकर भगवान से यह प्राथना करोंगे कि '' है प्रभु इस प्रकार के लोगो का स्वीकार करना मुझे शिखाना... उन लोगो कि में मदद कर शकु इतनी मुझे हिम्मत देना'' .....
(आप को यह प्रेरणास्पद कथा कैसी लगी अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे...जनक नाम तो याद रहेगा शायद... )

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