हम-तुम आज हम लोगो से कुछ बाते करना चाहते है..हमे उनकी मदद करनी चाहिए दोस्तो...
हम-तुम : '' चार दिनो का प्यार हो रब्बा फिर लंबी जुदाई''
आखिर ऎसा क्यों होता है प्यार करने वालो के साथ ? आप को मालूम है क्यों ? आखिर प्यार क्यों होता है ? और प्यार होने के बाद जुदाई क्यों आती है....
कोई कहता है...प्यार का दूसरा नाम जुदाई भी है...लेकिन हम उस शख्स को केसे भूल शकते है..जिनके साथ हमने पूरा जिवन बिताने की कसमे खा रखी थी...उसको केसे भूला सकते जिसे हमारी पसद-ना पसंद सभी मालूम हो..जिन के लिए हम सब-कुछ है... जिसने सातो जनम का साथ निभाने का वादा किया है...
प्यार हर किसी को होता है...हमे भी हुआ... हमने भी प्यार को जाना..उसे बिलकुल नजदिक से पहचाना...और शायद इसलिए इस जुदाई नाम के शब्द से हमे बहुत डर लगने लगा है.
दुनिया में हर तरह की बीमारी की कोईना कोई दवा है...लेकिन प्यार में मिलने वाली जुदाई और बेबशी की कोई दवा नही...आखिर कोई अपने प्यार को केसे भूला सकता है जब कि प्यार तो मरने के बाद भी अमर रहता है...
यह एक एसी मंजिल है... जहाँ पर आपको सिर्फ और सिर्फ चाहत मिलती है...और जिसके नसीब में चाहत नहीं होती उसे सिर्फ जुदाई मिलती है...

जुदाई का मतलब सिर्फ जुदा होना है क्यां ? अगर है तो दो दिल जो एक दूसरो से जुड चुके है....उसे जुदा केसे किया जा शकता है.... ?
कोई कहता है कि जो दिल बिछडते है...वह फिर से मिल जाते है...जो फुल मुरजा जाते है वह फिर से खिल जाते है...क्यां हमारे प्यार के साथ भी ऐसा नहीं हो सकता....
हम दोनो आप से मदद चाहते है...हम क्यां करे अपने प्यार को पाने के लिए... हम आपसे वादा करते है कि हम आपस मे फिर कभी भी नहीं लडेंगे...
जनु की झुबानी :
प्यार मे कभी कभी ऎसा भी होता है.... आपका प्यार गहराता जाता है... उसे पाने का जुनुन आप पर सवार हो जाता है.... लेकिन उसी समय कुछ एसी चीजे हमारी समाने खडी हो जाती है...जिसमें हम क्यां करे और क्यां न करे वह समझ में नहीं आता... उस वक्त हमे क्यां करना चाहिए...
हमारी कही फिल्मो में कहाँ गया है कि जब दिमाग फैसला लेना छोड दे तब दिल की बात सुननी चाहिए...सिर्फ और सिर्फ उस समय अपनी आँखे बंद कर लो...आप के दिल की सुनो वह क्यां कहता है.... और उसी पर अमल करो...
इस बारे में आप भी हम-तुम को कोई योग्य मार्गदर्शन दे शकते है...

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