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हम-तुम

(हम-तुम जो हमेशा एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं।)

हम : आखिर स्वाभिमान आ गया ना बीच में तुम्हारे...

तुम : नहीं...ऎसा कुछ भी नहीँ...

हम : जब सब कुछ ठीक चल रहाँ था...तो अचानक यह कयां हो गयाँ ?

तुम : पगली...यही तो प्यार है...

भगवान हर पल हम दौनो की परीक्षा लेता रहता है... वह हमे मिलाता है...हमे एक दूसरे से दूर भी करता है...ताकि हम एक दूसरे की जरुरुत को महसूस कर शके...


हम : नहीं तुम्हे मेरी बिल्कुल भी फिर्क नहीँ...

तुम : शायद तुम सहीँ हो....और में गलत...लेकिन एक बार सोचकर तो देखो कि मे तुम्हे कितना चाँहता हुँ... तुम्हे मालूम नहीं शायद लेकिन जब तुम रोती हो तब आँसु तो मेरी आंखो मे ही आते है...


हम : वह सिर्फ कहने की बाते है...

तुम : तुम्हे मालूम है.... कभी कभी चीजे वेसी क्योँ नहीँ दिखती जेसी हम चाँहते है...?

हम : क्यों...? ...

तुम : क्योंकि यहीं संसार का नियम है... जब हमे लगने लगे की जीवन से खुशी और सुख चला गया है... जब लगे कि प्यार भरी मुस्कान कही गुम हो गई है... हर बार अपने प्यार को ढूँढने वाली आँखे जब झुक जाती है...तब समज लो आप का प्यार मुश्किल में है.... भगवान ने हमारी परीक्षा लेना शुरु कर दिया है... .और हमे उसमे उर्तीण होना है...

हम : तुमने मेरा विश्वास तोडा है...

तुम : जब रिश्तो की दीवाल इतनी मजबूत हो गई है तो भला विश्वास को मे केसे तोड शकता हुँ ....

हम : तुमने मेरा दिल दु:खाया है...

तुम : जो दिल दर्द महसूस न करे...वहाँ भला प्यार कहाँ से कर शकता है...

हम : तुमने मेरी तरफ देखा ही नही...your are selfish...

तुम : वो तुम्हारा भ्रम है...मेरी आँखे तो सिर्फ तुम्हे ही देख रही थी...शायद तुम देख नहीँ पाई... जैसे देखने वाले को सिर्फ चाँद ही दिखता है..और आसपास के तारे नहीँ दिखते वैसे...तुम्हारी आँखो ने सिर्फ बूरी चीजे देखी...वह अच्छी चीजे नहीँ देख पाई...

हम : आज मेरे प्यार के सामने अंधेरा छा गया है.... में कहाँ हुं वह मुझे नजर नहीँ आ रहाँ...

तुम : तुम यह क्यों नहीं जानती की हर अंधेरे के बाद ही तो उजाला होता है... जैसे रात के बाद ही तो सवेरा होता है....तुम खुश रहती हो तो लगता है पूरा जहाँ खुश है... और जब तुम रुठ जाती हो तो ऎसा लगता है कि जैसे दिल ने धडकना छोड दिया है...

हम : नहीँ मे तुमसे कभी नहीँ बोलुंगी...

तुम : लेकिन तुम्हे बोलने की कोई जरुर भी नहीँ क्योंकि प्यार तो आँखो से छलकता है...और तुम्हारी आँखे मुझे सब कुछ बयाँ कर रही है...आई लव यू...आई लव यू...आई लव यू लोट्स

( वो चली जाती है...और वह सिर्फ उसे देखता रह जाता है... वह एक बार भी पीछे मुड कर नहीँ देखती.. )

जनु की झुबानी

कभी कभी प्यार में ऎसा भी तो होता है....इसलिये जब भी प्यार करे...अपनो का ख्याल रखे.... उसे पूरा मान-सन्मान दे....और खास बात उसकी भावनाऔ को समझे...शायद दुनिया की नजर में यह पागलपन हो शकता है लेकिन आप के लिए तो वह सिर्फ और सिर्फ प्यार है...समझे.... जनक)

प्रतिक्रियाएँ

Re: हम-तुम
गुड वेरी गुड
Re: हम-तुम
पता नहीं क्यों ऐसा होता है, जब दो लोगों में से किसी एक ने (हम ने तुम को ) उसके कहे अनुसार, उसके साथ-साथ उसके परिवार का भी ख्याल रखा और इतना प्यार दिया कि उसके लिए, उसने अपने मम्मी-पापा से भी झूठ बोला। लेकिन जब हम को तुम की जरुरत थी, तब वह उसके साथ नहीं था। हम ने हमेशा तुम के मन की बातें उसके बिना कुछ कहे ही समझ ली, लेकिन तुम आज तक हम को नहीं समझ पाया............नहीं समझ पाया कि हम को कब उसकी जरुरत पड़ सकती है और उसे क्या चाहिए, किस बात से उसके दिल को दु:ख पहुँचता है । तुम हमेशा कह देता है उस से कि तुमने मेरे साथ ऐसा किया, वैसा क्यों किया । पर कभी यह नहीं सोचा कि "हम" जिसने कि हमेशा चुपचाप सब सुना, उसके मन की बात भी मैं कभी सुनू । एक बार उससे पुछू कि तुम्हारे दिल में क्या है! तुम्हे क्या पसंद है और क्या नहीं। हमेशा उसने ही "तुम" को समझा, हमेशा "हम" को ही झुकना पड़ा और आज भी वहीं स्थिति है। वैसे एक बात है, "तुम" को मनाना बिललुल भी नहीं आता, उल्टा मनाने के बजाय खुद ही मुँह फुलाकर बैठ जाता हैं। खैर.........कोई बात नहीं ।
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