मुल्ला नसीरुद्दिन की के किस्सो से आप सभी अच्छी तरह वाकेफ है उनमे जो बात थी वो शायद किसी में नही थी उनकी बृद्धिप्रतिभा से जुडा़ एक और किस्सा में यहा प्रस्तृत करने जा रहाँ हुं। मुल्ला नसीरुद्दिन एक बार नाई की दुकान पर अपने बाल कटवाने के लिए गये। नाई ने उनको सीट पर बिठाकर अपना काम शरु किया। उन दोनो के बीच में अच्छी बातचीत चल रही थी। उन्होने अलग अलग मुद्दो पर कई सारी बाते की।
अचानक दोनो के बीच में भगवान के अस्तित्व को लेकर एक मुद्दा छीड गया।
नाई बोला '' मुल्लाजी में नहीं मानता कि इस दुनिया में भगवान का कोई अस्तित्व है। ''
क्यों ? मुल्लाजी ने कहाँ।
नाई बोला '' आपको हमारे शहर के नुक्कड में जाना चाईए। वहा पर कही सारे भिखारी बेठते है जिनको हर दिन पूरा खाना भी नहीं मिलता। अगर इस दुनिया में वाकैही में जो भगवान का अस्तित्व होता तो आज उनकी यह हालत न होती।
मुल्लाजी नाई से कोई बहस करना नहीं चाहते थे। उन्होने शांत बेठना ही मुनासिफ समजा। जब नाई ने अपना काम कर लिया तो मुल्ला अपने घर की और रवाना हुए।
वे जैसे ही नाई की दुकान से बाहर निकले, बिलकुल उसी समय एक बड़े बाल और लम्बी दाढ़ी वाला शख्स उनके सामने खडा दिखाई दिया। वह बहुत गंदा दिख रहा था।
मुल्ला ने उसे देखकर नाई को पुकारा। मुल्ला की आवाज सुनकर नाई बहार आया।
मुल्लाने नाई से कहाँ '' क्यां तुम्हे मालूम है इस दुनिया में नाईओ का भी अस्तित्व नहीं है।''
आप ऎसा केसे कह शकते हो ?
'' में खुद नाई हुँ और बाल-दाढ़ी का काम करता हुँ। '' नाई बोला
मुल्लाजी फिर से बोले '' नाईओ का कोई अस्तित्व नहीं क्योंकि अगर उनका अस्तित्व होता तो आज इस आदमी के बाल और दाढ़ी इतने बड़े न होते।
नाई ने अपनी सफाई देते हुए कहाँ कि '' उसमे मेरा क्यां दोष जब यह आदमी ही मेरे पास बाल और दाढ़ी करवाने नहीं आता। में जबरन तो उसे खीचकर नहीं ला शकता।''
तुम सही हो'' मुल्ला ने कहाँ।
'' में भी तो तुम्हे यहीं कहना चाहता हुँ कि जब तक कोई इंसान स्वयं चलके भगवान के पास नहीं जाएंगा तब तक वह अपने दु:ख और पीडा से निजात पा शकेंगा।''
अर्थात भगवान का अस्तित्व है।
आपका क्यां मानना है इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे।

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