'''तु कितनी अच्छी है तु कितनी प्यारी है माँ और मेरी माँ'' शायद उन चारो बेटो को भी एक समय ऎसा ही लग रहा होंगा कि उनकी माँ दुनिया की सबसे प्यारी माँ है लेकिन उनका सोचना बिल्कुल गलत था।
आखिर एक माँ अपने बेटो को सात साल तक अपने ही घर में बंदी बनाकर केसे रख शकती है ?
अहमदाबाद के गोमतीपुर में रहनेवाली प्रितम कौर ने यह हिन्न कृत्य किया। वो तो भला हो उन स्थानिय लोगो और पुलिस का जिनकी बदोलत आज उसके बेटे सात साल की केद के बाद मुक्त हुए है।
कौन है यह प्रितम ?
अमदावाद के गोमतीपुर की बालाभाई चाली में रहने वाला जशबीर सिंघ छाबडा आटो रिक्षा चलाकर अपने घरका गुजारा करता था। उसने प्रितम कौर नाम की लड्की से शादी की । वर्ष 2001 में जशबीर का देहांत हो गया और पूरा परिवार एक बडी आर्थिक विपदा में आ गया।
पति कि मौत का प्रितम के दिमाग पर गहरा असर पडा। उसने कोई अंजाने डर के कारन अपने ही बेटो को एक छोटी सी खोली में केद कर दिया। प्रितम को हमेशा यही डर रहता था कि कोई उसके बेटो को मार देंगा।
पुलीस के अनुसार प्रितम कौर अपने बेटे को मजबूत रस्सी से बाँध कर रखती थी जीससे वे भाग न शके।
भीख मांगकर होता था गुजारा
प्रितम दिनभर नजदीक के गुरुद्रारा में छोटा-मोटा काम कर के बाद में भीख मांगकर अपने बेटो के लिए खाना लेकर आती थी। उन सबके लिए यह खाना बहुत कब होता था। जीसके तहत उसके चारो बेटे कुपोषण के शिकार हो गए।
हेरत की बात तो यह है कि प्रितम के बेटे पुख्त होने के बावजूद भी अपनी माँ कि केद से निकल नहीं शके। प्रितम का बडा बेटे जशबीर की आयु 26 वर्ष है उससे छोटा, गुरदीप कौर (24) तरलोचन सिंघ (22 वर्ष) और हरभजन सिंघ (19) है। चारो में से एक बेटा तो मुकबधीर है। कुपोषण के चलते चारो बेटो को फिलहाल यहाँ कि सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया है।
क्यां कहना है प्रितम का ?
प्रितम कहती है कि ' पति के देहांत बाद उसके ससुराल वाले जायदाद के मामले में उसे हमेशा परेशान करते रहते थे। उसे डर था कि उसके ससुराल वाले उसके बेटो को नुकशान पहुँचाऎगे। फिलहाल प्रितम को गोमतीपुर पुलिस के हवाले किया गया है
आखिर ऎसी माताओ को सजा देनी उचित है ? अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे।
(गुजरात के एक प्रसिद्ध वर्तमान पत्र से साभार)

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