दुनिया कि नजरो में जो में घोडा होता तो घोडे के रुप में शायद ''चेतक'' कहेलाता। उँट के रुप में ''रेगिस्तान का जहाज'' कहलाता। चलो गघा भी होता तो कम से कम ''कल्लु कुम्हार का गध्धराज'' तो कहलाता। पर अफसोस में तो ईसान हुँ..सच्ची पत्रकारिता क्यां है उसको बया करने वाला एक हास्य और कटाक्षभरा आलेख पढने के लिए नीचे दी गई हुई लिंक पर क्लिक करे और अपनी प्रतिक्रिया अबश्य भेजएंगा।
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जनक

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