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Cantrol_ C & Cantrol_V

एक बोस और कर्मचारी की मनोव्यथा

कभी कभी कुछ रिश्ते बिना कारन ही बिगड जाते है। दोष किसी का भी नहीं रहेता लेकिन हालात ऎसे हो जाते है कि आप अपनो से दूर हो जाते है। आफिस में भी बोस और उसके कमर्चारी के बीच एक खास रिश्ता होता है।

कभी कभी उन लोगो में भी कुछ मतभेद होते है। उस समय दोनो के दिमाग और मन में किस तरह की मनोव्यथा होती है वह में यहा पर प्रस्तुत करने जा रहाँ हूँ।


Cantrol_ C

आना तु बहुत चाँहता हूँ, आप लोगो के पास लेकिन किस मुह से आउ,

तुम लोगो को देखकर कही सवाल पैदा होते है।

मन में डर रहेता है कि कही तुम लोग किसी मुद्दे को लेकर मुझसे लड़ तो नहीं बेठोंगे ?

कहाँ गई वो दोस्ती, कहाँ गया वो प्यार ?

जो में तुम को देना चाँहता था और तुम से लेना चाँहता था।

आप तो मेरे छोटे भाई थे लेकिन आपने ऎसा क्यों किया ?



Cantrol _V

हम तो कहीं नही गये बस यही पर है,

लेकिन शायद आपकी आँखो ने ही हमे ढूंढना छोड दीया

कहते है ना कि '' चाँद को देखने वाले सितारो पर नजर कम डाला करते है''

कुछ हाल आपका भी ऎसा ही है।

शायद आपको मालूम नहीं कि ''चाँद में दाग होता है''।

और तारे दूर रहकर भी ''टिमटिमाते'' रहते है।

रहीं बात प्यार और झगड़े की

तो याद रखीए 'छोटे तो हमेशा छोटे ही होते है, गलतियाँ करते रहते है।

बड़ो का फर्ज है कि उनको सही दिशा दिखाए।

लेकिन अफसोस

यहाँ पर तो ''बडे ही बच्चे बने'' हुए है।

प्रतिसाद

Re: Cantrol_ C & Cantrol_V
अच्छे वक्त का इंतजार करो, नफरत करने वालों से प्यार करो, क्योंकि कहते हैं फिल्म बाकी है.
अस्वीकरण