डम्बु नाम का एक हाथी था। सर्कस में ही उसका जन्म हुआ लेकिन बचपन से ही उसे सभी लोगो की धृणा और नफरत का शिकार बनना पडा। बात सिर्फ इतनी थी कि डम्बु दिखने में दूसरे हाथीओ जेसा नहीं था। उसके कान बहुत बडे थे। उसे देख कर लोग उसका मजाक उडाते थे बच्चे भी उसको परेशान करते रहते थे। सरकस के मालिको ने भी डम्बु की शकल देखकर उस को वह खेल नहीं शिखाए जो दूसरे हाथीऔ को शिखाए जाते थे।
बैचारा डम्बू जोकरो के साथ सर्कस में लोगो का मनोरंजन करता रहता था। वह मन ही मन बहुत दु:खी था।
उसका दु:ख देखकर उसके परम मित्र चिनु चुँहे को दया आई। वह डम्बु को कालु कौए के पास ले गया। चिनु डम्बु का दु:ख दुर कर के उसे स्टार बनाना चाँहता था। दोनो कालु के पास पहुँचे।
कालु एक लालची कौआ था। उसने दोनो को अपनी बातो के जाल मे फसा लिया और अपना एक पंख निकालकर डब्बू को दिया।
कालु ने डब्बू को यह पंख अपनी पूँछ में लगाने के लिए कहाँ। उसका मानना था कि यह जादुई पंख लगाने से डम्बु हवा में उड़ने लगेंगा, और उसका यह खेल ही उसको लोकप्रियता दिलायेंगा क्योंकि सब लोग जानते है कि ''हाथी कभी उड़ नहीं शकते।''
डम्बु ने वह जादुई पंख अपने पूँछ में लगाया और उड़ने का प्रयास करने लगा। उसने बहुत प्रयत्न किया लेकिन वह उड नहीं पाया। उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने थोडी उंचाई से उड़ने का प्रयास किया।
डम्बु हर दिन उचाई से उडने का प्रयास करता था और आखिर में उसकी महेनत रंग लाई और वह हवा में उड़ने लगा। लोग भी उसे उड़ता देखकर आश्वर्यचक्ति हो गए। अपने इस खेल से डम्बू बहुत लोकप्रिय हो गया।
एक दिन ऐसा ही एक खेल चल रहाँ था डम्बू बहुत उचाई से छलांग लगाकर उडनेवाला था लेकिन अचानक ही कोई उसके पंख की चोरी कर भाग गया।
डम्बू रोने लगा उसे देखकर चिनु जोर से चिल्लाया '' डम्बू तुम उड़ शकते हो दुनिया में कोई जादुई पंख नही है वह तो सिर्फ एक दिखावा था तुम नीचे कुदो तुम उड शकते हो डम्बू।''
डम्बू अपने दोस्त की बात मानकर नीचे कुद पड़ा।
डम्बू तेज गति से जमीन पर आ रहाँ था। अचानक डर के मारे वह अपने कान हिलाने लगा उसके कान बहुत बडे थे और उसके सहारे ही वह हर बार उडता था।
यह बात आज उसको मालूम हुई थी वह आसमान के पंछी की तरह हवा में उड़ रहा था और लोग भी उसके इस कौशल्य को देखकर वाहवाही लूंटा रहे थे।
आज डम्बु वाकैहि में बहुत खुश था। उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।
जनु की जुबानी
* अगर आपको देखना ही है तो हर एक की विशेषतायें देखिए अगर आपको कुछ छोडना ही है तो अपनी कमजोरियाँ छोडिए।
* हथियार स्वयं खतरनाक नहीं होते परन्तु मानव के अदर छिपा द्वेष और क्रोध ही उन्हे हानिकारक बना देता है।
* यदि आप हर कार्य पूरी लगन से करते है तो आपको कभी पछताना नहीं पडेगा।

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