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हाँ यहीं प्यार है....

''साथ रहेना ही सिर्फ प्यार नहीं लेकिन साथ निभाना भी तो सच्चा प्यार है'।'

भला कोई केसे भुल सकता है अपनी शादी का पहला दिन, मुझे भी वह दिन याद है।

उस दिन मे अपनी दुल्हन को अपने दोनो हाथो से उठाकर मेरिज कार से लेकर बेडरुम तक ले गया था।

आखिर दोस्तो से मेरी शर्त जो लगी हुई थी वो कहते थे कि में उस को उठा नहीं पाउगा लेकिन मेने वह कर दिखाया।

आज उस दिन को दस साल हो गए।

आज में और मेरी पत्नी एक प्राईवेट कंपनी में जोब करते है मेरे घर में एक बेटा है। हमारे जिवन में अब कुछ नया पन नहीं। प्यार भी मालूम नहीं कहाँ गुम हो गया।

हम दोनो सुबह-सुबह अपने अपने दफ्तर निकल जाते है और शाम को वापस आते है। वह मेरे लिए टेबल पर खाना रखती है और में खाकर ओफिस की बाते करता रहता हू। क्यां करु न चाहते हुए भी अब मेरी ओफिस घर में खाने के टेबल तक पहुच गई है।

वह एक अच्छी पत्नी है। मेरा और मेरे बेटे का पूरा खयाल रखती है लेकिन मेरा मानना है कि शायद हम दोनो के बीच वह प्यार नहीं रहा जो आज से दस साल पहले था।

ईसी दौरान मेरे जिवन में माया आई। सच में क्यां लगती थी वह। सर से पाव तक मानो स्वर्ग की अप्सरा। किसी शिल्पकार ने बडी फुरसत से उसको बनाया हो वेसी वह दिखती थी। उस के गुलाबी होठ जिसको हर पल छुने का मन करता रहेता था। उस की कजरारी आँखे न चाहते हुए भी उसकी और देखने पर मजबूर करती थी। माया सच में ही एक बडी 'माया' थी और इस के ईस मायाजाल में मे हर दिन फसाता जा रहा था।

उसने यहाँ तक कह दिया था कि वह मुज से शादी करने को तैयार है पर शर्त है कि में अपनी पत्नी को तलाक दे दू ।

तलाक नाम सुनके ही मेरे रोंगटे खडे हो जाते थे। अगर में उसको तलाक दे दु तो वह बैचारी क्यां करेंगी मेरे अलावा उसका कोई और है भी तो नही। और जब वह सुनेंगी कि मे उससे तलाक चाहता हुं तो उसकी प्रतिक्रिया क्या होंगी।

लेकिन में भी लाचार था। माया का वह लचीला बदन हर पल मेरे दिमाग में छाया हुआ था और आखिर में मेने अपने मन में तलाक का निर्णय कर लिया।

तलाक की बात सुनकर वह गुस्सा हो गई वो मेरे सामने हाथ जोड्कर रोने लगी। वह मुझे अपनी गलती के बारे में पुछने लगी लेकिन में कोई जवाब नहीं दे पाया।

मेने अपनी आधी जायदाद उसके नाम करने का निर्णय किया। मेने सारे कागजाद उसके हाथ में दिये लेकिन उसने उसको फाड दिया वह सिर्फ रोए जा रही थी बस रोए जा रही थी।

उस दिन में माया से मिलने के बाद रात को बडी देर से घर पहुंचा। वह एक लिफाफे में कुछ लिख रही थी। उसने वह लिफाफा मुझ को दिया जिस मे लिखा था कि वह मुझे तलाक देने के लिए राजी है बर्शत है कि मुझे एक महिने तक उस को अपनी गोद में उठाकर बेड रुम से घर के बाहर तक ले जाना पडेगा जिस प्रकार में अपने शादी के पहले दिन उसको उठाके लाया था।

एक महिना इसलिए क्योंकि एक महिने के बाद मेरे बेटे की छुट्टिया खतम होने वाली थी और वह होस्टेल लौटने वाला था और वह नहीं चाहती थी कि वह हम दोनो की जुदाई को अपनी आँखो से देखे।

मुझे उस की बात में हँसी आई। शायद वह हमारी जुदाई भी एक हसीन यादगार पल के साथ बीताना चाँहती थी मे राजी हो गया।

में हर दिन उस को उठाकर बेडरुम से घर के बाहर ले जाता था और वह भी अपने दोनो हाथो से मेरी गोद में लिपट जाती थी। मानो वह कह रहीं थी ''में तुम्हारे बीना नहीं रह शकती मुझे तुमसे जुदा मत करो।''

पहले दिन मेने महसूस किया कि अब वह बहुत ही दूबली हो गई है जेसी वह पहले नहीं थी। मे भी केसा इंसान हूँ इतने सालो तक मेने कभी उसके स्वास्थ्य के प्रति ध्यान हीं नहीं दिया।

दूसरे दिन जब मेने उसे उठाया तब उसके कपडो में से आनेवाली पसीने की बदबू से जाना कि वाकहि में वह कितना काम करती है।

तीसरे दिन वह कहती है कि ''देखो मेरे जाने के बाद घर के बगीचे का पूरा ध्यान रखना और हर दिन पौधो को पानी पिलाते रहना।'' में कुछ भी नहीं बोल पाता।

चौथे दिन वह कहती है कि '' देखो तुम्हारे कपडे प्रेस कर के मेने अलमारी में रख दिए है। नहाते समय तोलिया लेकर बाथरुम में जाना मत भूलना क्योंकि तुम अक्सर उसे बहार ही भूल जाते हो और अपने जुते स्टेन्ड में रखना मत भूलना।

आज आखरी दिन था। पिछले 29 दिनो में मेने महसूस किया था कि वह मुझे कितना प्यार करती है। अब माया कि छबी मेरे दिमाग मे से बिलकुल निकल गई थी।

मेने उसे उठाया और घर के बाहर ले जाने लगा। उसने वही शादी का जोडा पहना था। वह बहुत खुबसुरत लग रहीं थी। लेकिन यह क्यां में उसे उठा नहीं पाया शायद मेरा दिल उसको मुझसे जुदा करना नहीं चाँहता था।

अरे हाँ यहीं तो प्यार है... मे समझ गया।

मे कुछ नहीं बोला और दोड के माया के पास चला गया।

माया को मेने सिर्फ इतना ही कहाँ ''हो शके तो मुझे माफ कर देना लेकिन में अपनी पत्नी को छोड नहीं शकता क्योंकि वह मुझे बहुत प्यार करती है और में भी उससे बहुत प्यार करता हुँ।'' '' आई लव माय वाईफ लोट्स''



बी माय वेलेन्टाईन :

''साथ रहेना ही सिर्फ प्यार नहीं लेकिन साथ निभाना भी तो सच्चा प्यार है'।'

आज आप अपनी प्रेयसी याँ अपनी पत्नी को बता दो कि उसके साथ बिताए हर लम्हो को आपने केसे जिया है। आप उन्हे बता दो कि आप उनसे कितना प्यार करते हो...

Someone say's ''Love is not finding the perfect person but to love the person with his imperfection''

आप उनसे कहो कि '' jaan i agree i am not perfect but i love you form the bottom of my, heart.Your smile gives me serentity, i wish it to we with u till infinity.Your eyes are the reflex of ur soul, so real generous and pure.' ''

You r my good luck charm. i will love you forever.....with all my heart.

(कृपया हिंदी सुधारके पढे और आर्टिकल के बारे में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे।)

प्रतिसाद

Re: हाँ यहीं प्यार है....
आपने बिल्कुल सही कहा है, दुनिया में प्यार तो हर किसी को होता हैं, लेकिन सच्चा प्यार सिर्फ नसीब वालों को ही मिलता हैं। इकरार में शब्दों की एहमियत नही होती, दिल के जज्बात की आवाज़ नही होती, आँखें बयाँ कर देती हैं दिल की दास्ताँ, मोहब्बत लफ्जों की मोहताज नही होती |
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