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14 फ़रवरी, 2008


ब्लॉग्स (2)
भला कोई केसे भुल सकता है अपनी शादी का पहला दिन, मुझे भी वह दिन याद है। उस दिन मे अपनी दुल्हन को अपने दोनो हाथो से उठाकर मेरिज कार से लेकर बेडरुम तक ले गया था। आखिर दोस्तो से... और पढ़ें...

प्यार के लिए उसने जो भी करना था वह सब कुछ किया लेकिन शायद उसके नसीब में वो सुख था ही नहीं जिसका सपना वह हर दिन देखा करता था। आज वह इस दुनिया की भीड़ में कहीं गुम हो गया है उसका कोई पत्ता नहीं। हम चाह के भी उसे... और पढ़ें...