एक कौए को जमीन पर एक मास का टुकडा दिखा। जब वह मास का टुकडा पकडने के लिए जमीन पर आया। दूसरे कौए और एक बाज ने यह देख लिया वो दोनो भी टुकडा पाने की लालच में जमीन पर आए।
पहले वाला कौआ टुकडे को बचाने के लिए जितना हो शका उतना उचा आसमान में उडने लगा लेकिन दूसरे कौए और बाज ने उनका पीछा आखिर तक नहीं छोडा।
आखिर में कौए ने वह टुकडा जमीन पर गीरा दिया। जिस को पाने के लिए दूसरा कौआ और बाज लडने लगे। थोडी देर तक लडने के बाद दोनो एक दूसरे के हिस्सा में जितना आया उतना टुकडा लेकर उड गए।
पहले वाला कौआ दु:खी होने के बदले हँसते हँसते बोला ''मुझे मास का टुकडा नहीं मिल शका तो क्यां हुआ इस टुकडे ने दो लोगो की भु:ख तो मिटा दी। अगर मुझे यह टुकडा मिला होता तो में कभी भी इतनी उचाँई तक न उड शकता।
अब आप सोचेंगे कि यहाँ मेने नया क्यां लिखा है इस कहानी के पीछे में एक खास बात कहेना चाहता हूँ और वह है पोजीटीव थिंकीग के बारे में। यहाँ पर हमने कौए की हकारात्मक सोच देखने को मिलती है।
कहते है ना कि हर आदमी कभी सर्व गुण संपन्न नहीं होता शायद में भी नहीं हूँ। मुझे में भी कहीं ना कहीं नेगेटीव थिंकिंग भरा पडा है। आज हर ईन्सान चाँहता है कि कोई उसे पोजीटीव थिकिंग करना शीखा दे में भी शिखना चाँहता हूँ। आखिर हम हकारात्मक सोच केसे पा शकेंगे ?
वेदो में मोक्ष शास्त्र, अर्थ शास्त्र, काम शास्त्र और धर्म शास्त्र का उल्लेख है जिसमे इस के बारे में फाकी कुछ कहाँ गया है।
मोक्ष शास्त्र कहता है कि '' Only when we drop our Ego, do we realise the bliss that is within us''
अर्थ शास्त्र कहता है कि ''earn money out of love: not out of greed''. greed can never satisfy us''.
काम शास्त्र कहता है कि '' Convert sex into prayer ''
धर्म शास्त्र के अनुसार '' Let goodness not ambition, be the foundation of life out of goodness, let ambition arise''
हमारे मातापिता, भाईबहन, पत्नी और बच्चे हमारे प्यार और सुख दु:ख के हकदार है लेकिन हम उनके साथ सब कुछ बाते शेर नहीं करते,बस अपने दोस्तो के साथ अपनी भावनाओ को जाहिर करते रहेते है।
अगर आप सुखी दांम्पत्य जीवन चाहते हो तो हमेशा अपनी पत्नी को अपना दोस्त मानो उसे अपनी बात कहने की पूर्ण स्वतंत्रता दो।
कुछ लोग कहते रहते है कि 'में अपनी ओफिस की बाते घर पर कभी नहीं बताता।''
उनका यह बहाना रहता है कि अगर में अपनी ओफिस की बाते घर पर करुंगा तो भी मेरी पत्नी उसे समज नहीं पाएगी चूँकि वह मेरी सच्ची दोस्त है में उसे परेशानी में डालना नहीं चाहता।
एक तरह यह लोग सही बोल रहे है लेकिन दूसरी तरफ से देखे तो अगर आप अपने सच्चे दोस्त से ही सारी बाते सेर नहीं करोगे तो क्यां वो आपका सच्चा दोस्त है ?
यहाँ पर आपकी सोच नकारात्मक है आपको पोजीटीव सोचना है आप यह क्यों नहीं समजते कि आपनी अर्घांगिनी जो हर बार आपके सुख में साथ देती आई है वह आप के दु:ख में भी बराबर की हिस्सेदार बनना चाहती है।
कहते है ना कि ''सुख को बाट ने से बढता है और दु:ख को बाटने से कम होता है।
हमे भी अपने तमाम सुख-दु:ख में अपने खास दोस्तो के अलावा अपने परिवार को भी हिस्सेदार बनाना चाहिए क्योंकि यही हमारी 'सच्ची हिस्सेदारी' है।
साभार- The Speaking Tree
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