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कछुऐ की कारस्तानी

अगर आप कभी सर के बल न गीरना चाहो तो इसे पढो....

जंगल में एक कछुआ पैड पर चढने का प्रयास कर रहाँ था।

काफी समय होने के बाद वह पैड के उपर तक चढ पाया। बाद में उसने वहाँ से हवा में छलाग लगाई और साथ में अपने पैर फेलाकर उड्ने का प्रयास करने लगा लेकिन बैचारा कछुआ सर के बल नीचे गीरा।

कछुआ हारा नहीं उसने दूसरी बार यह प्रयास किया। अब की बार भी वह बडी जोर से नीचे गीरा उसके सर से खून बहने लगा और वह दर्द से कराहने लगा।

दूसरे पैड पर बेठे दो पक्षी यह नजारा कब से अपनी आँखो से देख रहे थै।

आखिर में एक पक्षी ने दु:खी स्वर में दूसरे पक्षी से कहाँ, ''शायद अब वह समय आ गया है जब हमे उस कछुए को बता देता चाहिए की हमने उसको गोद लिया था।''

जनु की जबानी

आप जो हो वहीं बनके रहो ज्यादा ओवर स्मार्ट बनने में भी नुकशान है।

कौआ चाहते हुए भी हंस की चाल कभी नहीं चल शकता और गधा भी चाहकर कभी घोडा नहीं बन शकता।
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