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• मुल्ला नसीरुद्दीन और चाबी

एक चाबी जिसकी तलाश हर सभी को है...

एक दिन हमारे मुल्लाजी रास्ते पर कुछ ढूँढ रहे थे। उन्हे देखकर वहाँ से गुजरनेवाले लोग पुछने लगे ' मुल्लाजी आखिर क्यां ढूँढ रहे है आप ?

मुल्ला ने कहाँ 'में अपनी चाबी ढूँढ रहा हुँ।

नसीरुद्दीन की बात सुनकर सभी लोग उनको चाबी ढूँढने में मदद करने लगे।

थोडी देर बाद एक सज्जन ने मुल्ला से पूँछा ' मुल्लाजी आपकी चाँबी कहां गुम हुई थी' ?

मुल्लाजी बोले 'वो तो घर पर ही खो गई थी।'

सभी लोग आश्वर्य में पड गए।

सज्जन ने फिर पुछा 'अगर चाबी घर पर ही गुँम हो गई थी तो आप इसे यहाँ पर क्यों ढूँढ रहे है।

मुल्ला का जवाब था 'यहाँ पर थोडा उजाला है इसलिए में यहाँ चाबी ढूँढ रहां हुं।

जनु की जुबानी

मुल्ला नसीरुद्दिन की बात अपने आप में ही हमे काफी कुछ कह देती है। यह कथा सिर्फ प्रेरणादायक है।

दुनिया के सभी लोग हमेशा कोई ना कोई चाबी ढूँढते रहते है। कोई सुख की तो कोई स्वतंत्रता की, कोई शांति की तो कोई भगवान से मिलने की चाबी ढूँढता रहता है।

दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी है जो सफलता, धन, और पावर या फिर पहचान बनाने की चाबी ढूँढते रहते है। शायद इन सभी लोगो को अपनी चाबी मिल नहीं रही इसलिए तो यह सभी लोग पागलो की भाँति अपनी अपनी चाबी ढूँढने में लगे हुए है।

दु:ख की बात तो यह है कि यह सभी लोग अपनी इस चाबी को उजाले में नहीं लेकिन स्वार्थ, डर, लोभ और पाप से भरे अंधकार में ढूँढ रहे है।

क्यां उन लोगो को भी मुल्लाजी की तरह अँधेंरे के बदले उजाले में चाबी नहीं ढूँढनी चाहिए ? आप ही बताईए।

क्या आपको अपनी चाबी मिली या फिर आप भी इसे ढूँढ रहे है।

(कृपया हिन्दी सुधारके पढे और आर्टिकल के बारे में अपनी प्रतिक्रिया अबश्य भेजे।)

 प्रतिसाद

Re: मुल्ला नसीरुद्दीन और चाबी
लेखक जी, आप काफी शिक्षाप्रद लेख लिखते हैं | आज समाज में शिक्षा की बहुत आवश्यकता हैं |