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मुल्ला नसीरुद्दिन और तीन बुद्धिजीवी

सिर्फ बुद्दिजीवी लोगो के लिए।

मुल्ला नसीरुद्दिन की बुद्धिप्रतिभा के किस्से पूरी दुनिया में मशहूर है। आज एक और किस्सा में आपके सामने प्रस्तृत करने जा रहाँ हुँ।

मुल्ला नसीरुद्दिन की बुद्धिप्रतिभा की बाते ' दिन दोगुनी और रात को चौगुनी' पूरी दुनिया में फेलने लगी। इस बात से दुनिया के अन्य बुद्धिजीवी चिंताग्रस्त हो गए।

उन्होने एक सभा का आयोजन किया जिसमे तीन ऐसे बुद्धिजीवीओ को चूना गया जो मुल्ला को टक्कर दे शके। वह अलग अलग देश के थे।

तीनो पूरी दुनिया में भ्रमण करते करते मुल्ला नसीरुद्दिन के नगर में आ पहोंचे। वहाँ पर उन्होने मुल्ला को सबके सामने पडकारा। फिर से एक सभा का आयोजन किया गया।

यह बुद्धिजीवी अपने अपने साथ एक एक सवाल ले के आए थै जिसका जवाब देना वाकैही में बहुत कठीन था।

पहला बुद्धिजीवी मुल्ला के सामने खडा हुआ 'बताऔ मुल्ला दुनिया का केन्द्र बिंदु कहाँ है' ?

मुल्ला बोले 'मेरे पैर की एडी के बराबर मध्य में'।

बुद्धिजीवी बोला 'नामुमकीन यह शक्य नहीं है आप साबीत करके दिखाओ'।

मुल्ला नसीरुद्दिन बोले 'बहुत आसान है, एक काम किजीए आप एक नाप पट्टी लेकर आईए और मेरे पैर से नाप लेना शरु कर दिजीए आप को खुद मालूम हो जाएंगा। पहला बुद्धिजीवी कुछ भी बोल नहीं पाया।

अब दूसरे बुद्धिजीवी की बारी थी। वह बोला ' बताओ मुल्ला आसमान में कितने तारे है' ?

मुल्ला बोले 'यह तो बिलकुल आसान सवाल है। मेरे गधे के सिर पर जितने बाल है उतने ही आसमान में तारे है।

दूसरा बुद्दिजीवी गुस्से में आकर बोला 'नामुमकीन भला गधे के बाल भी कोई गीन शकता है क्यां?

अगर आप आसमान के तारे गिन शकते है तो मेरे गधे के बाल क्यों नहीं गीन शकते' मुल्ला ने हँसते हुए जवाब दिया।

बेचारा दूसरा बुद्धिजीवी भी कुछ बोले बिना एक कोने मे जाकर खडा हो गया।

अब तीसरे बुद्धिजीवी की बारी थी यह व्यक्ति बहुत चालाक था। उसने मुल्ला के जवाब में से ही अपना सवाल ढूँढ लिया।

उसने मुल्ला से कहाँ आप को गधो के बारे में अच्छी मालूमात है। अब जरा यह भी बता दिजीए की 'आपके गधे की पूँछ में कितने बाल है ?

मुल्ला चौंके 'उन्होने कहाँ बिल्कुल आसान सवाल है जितने बाल आपकी दाढी में है उतने ही बाल मेरे गधे की पूँछ में है।

तीसरा बुद्धिजीवी भी गुस्से में आकर बोला 'नामुमकिन है यह आप साबीत करके दिखाओ'।

मुल्ला नसीरुद्दिन ने कहाँ ' में उसको बडी आसानी से साबीत कर शकता हुँ।

'आप मेरे गधे का एक बाल खींचो में आपकी दाढी का एक बाल खींचुंगा इस तरह हम एक-एक बाल खींचते जाएंगे जब आखिर में आपकी दाढी का एक बाल बचेंगा तब आपको मालूम होंगा कि यह संख्या समान है याँ नहीं।'

'चलो अब बाल खींचना शरु करे' मुल्लाने हँसते हुए उस तीसरे बुद्धिजीवी से कहाँ।

बेचारा तीसरा बुद्धिजीवी भी कुछ बोले बिना पीछे हट गया।

इस प्रकार मुल्ला ने तीनो बुद्धिजीवीओ को परास्त कर दिया।

सच में मुल्ला तो मुल्ला ही थे।

(कृपया हिंदी सुधारके पढीए और इस कथा के बारे में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे।)

प्रतिसाद

Re: मुल्ला नसीरुद्दिन और तीन बुद्धिजीवी
अछी कहानी है.लिखना जारी रखें.पढ कर लोगों को सीख ही मिलेगी.
Re: मुल्ला नसीरुद्दिन और तीन बुद्धिजीवी
आपका लेख वाकई प्रशंसनीय हैं | आखिर बुद्धिमान तो आखिर बुद्धिमान होता हैं, जिसके आगे पूरी दुनिया ही मूर्ख साबित होती हैं |
अस्वीकरण