Webdunia: Portal - Search - Mail - Greetings   More >>
Support | Font Download | Feedback
Take a tour | Family Filter: On
Search  
Welcome, Guest  [ Register | Sign In ]

गाँधी की हत्या के प्रत्यक्षदर्शी

गाँधी की साठवी पुण्यतिथि पर विशेष

आज राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की साठवी पुण्यतिथि है आज से ठीक 60 साल पहेले हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को गोली से मारा गया था। यहाँ पर में उस घटनाक्रम के मुख्य प्रत्यक्षदर्शीओ को प्रस्तृत कर रहाँ हुं।

पत्रकार अजीत भट्टाचार्य एक मात्र नाम है जिन्होने उस घटना का रिपोर्टींग किया। वह खुद बताते है कि '30 जनवरी का वह दिन आज भी मुझे याद है उस समय में हिंदुस्तान टाईम्स में काम कर रहाँ था और हमे हमारे संपादक ने इस घटनाक्रम कें बारे में सूचित किया देवदास गाँधी (महात्मा गाँधी के बेटे) ने यह खबर दी थी।

भट्टाचार्य की उमर उस समय 23 साल की थी वह कहते है कि उस समय 24 घंटे की न्युज चेनले नहीं थी ना ही कोई मोबाईल फोन फिर भी गाँधीजी की हत्यां कि खबर एक आग की तरह पुरी दुनिया में फेल गई।

यहाँ तक कि उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु घटनास्थल पर पहोंचे लोगो की भीड बीरला हाउस के पास ईकठ्ठी हो गई थी।

दूसरा नाम है प्रभुभाई पटेल 85 वर्षीय यह शख्स भी उस समय वहाँ मोजुद था जिन्होने बीरला हाउस के पास जमा हुई लोगो की भीड का पूरे दिन संभाला।

'में उस समय बीरला हाउस में था मेरा काम लोगो को काबू में रखने का था। यह वहीं लोग थे जो महात्मा गाँधी की प्राथना सभा में हाजरी देने आए थे'।

गाँधीजी के नजदिकी मित्र पटेल शायद उन लोगो में से एक है जिन्होने अपनी आँख से राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या होती हुई देखी थी।

उनका कहना है कि 'हमने गोली की आवाज सुनी और गाँधीजी जमीन पर गीर पडे'।

आज पटेल और भट्टाचार्यजी अपनी अलग-अलग जिंदगी जी रहै है।

(न्युज एजन्सी की खबरो से साभार)

(कृपया हिन्दी सुधारके पढीए और आर्टिकल के बारे में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे।)
अस्वीकरण