नसीरुद्दिन की के किस्सो से आप सभी अच्छी तरह वाकेफ है उनमे जो बात थी वो शायद किसी में नही थी उनकी बृद्धिप्रतिभा से जुडा़ एक और किस्सा में यहा प्रस्तृत करने जा रहाँ हुं।
नसीरुद्दिन हमेशा अपने गधो के साथ एक नगर से दूसरे नगर में घुमा करते थे। कभी-कभी दूसरे नगर में प्रवेश करने में रात हो जाती थी। वह हमेशा अपने गधो पर कुछ घरेलू सामान लेकर जाते थे। चोर-लूटैरो से बचने के लिए वो हमेशा उस सामान के उपर सूखी घास रख देते थे जीससे किसी को मालूम नहीं हो पाता था कि नसीरुद्दिन के पास क्यां क्यां है।
एक दिन सामान कुछ ज्यादा ही था और नसीरुद्दिन भी काफी थक गये थे। रात का समय था दूसरे नगर में प्रवेश करते समय अचानक ही वहा तैनात एक चौकीदार ने उन्हे देख लिया उसने मुल्लाजी को रोककर गधो की तलाशी ली लेकिन घर के सामान के अलावा कुछ भी नहीं मिला गुस्से में आकर उस चौकीदारने सारा सुखा घास ही जला दिया।
अब यह वाकयां हर दिन बनता था वह हर दिन मुल्लाजी के गधो की तलाशी लेता और जब उसको कुछ नहीं मिलता तब वह गंधे पर लदा सूखी घास जला देता या उसे पानी में डाल देता।
बैचारे हमारे मुल्लाजी चाह के भी कुछ नहीं कर पाते थै क्योकि वो नगर का चौकीदार जो था।
कुछ समय बाद यह चौकीदार सेवा निवृत हो गया और वह दूसरे नगर चला गयां। यहा एक दूसरा चौकीदार उसका दोस्त बन गया।
एक दिन दूसरे चौकीदार ने पहेले वाले से पुछा क्यां तुमने कभी कोई चोर को पकडा है।
चोकीदार बोला : मेने कई बार उस मुल्ला नसीरुद्दिन को रंगे हाथो पकडा है।
दूसरा चौकीदार : क्यां बात कर रहे हौ मुल्ला नसीरुद्दिन को। उनके पास से तुमे कुछ हाथ लगा क्यां ?
पहला चौकीदार थोडी देर सौचने बाद सर पर हाथ रखकर बोला : और तो कुछ नहीं... सिर्फ गधे।
जनु की जुबानी :
यार जिसका कोई दोष नहीं उसको फसाने में क्यां फायदा ? आज तुम किसी को फसाओगें तो कल तुम में भी कोई फसाने वाला मिल जाएंगा। चौकीदार ने बोल तो दिया कि उसने मुल्लाजी के पास से गधे पकडे (जो मुल्लाजी के ही थे) लेकिन वह खुद नही जानता था की इस मुर्खतासभर कार्य से वह नसीरुद्दिन और दूसरे चौकीदार की नजरो में गधा साबीत हो गया।
कहावत है ना ' शेर के उपर सवा शेर मिल ही जाता है'।
यार जियो और सबको हंसी से जिने दो। क्योंकि हम सब जानते है कि जिंदगी सिर्फ चार दिन की है।
(हिन्दी सुधारके पढीए और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजे हमे आपका इंतजार है।)

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