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मुल्ला नसीरुद्दीन और चाँदी का सिक्का

यार कभी-कभी मुर्ख बनने मे भी समजदारी है

आज ब्लोग पर बहुत सारे मित्र कोईना कोई कथा सुना रहे थै मेने सोचा चलो में भी आपको एक कथा सुनाही देता हुं।

आप सभी मुल्ला नसीरुद्दीन के बारे में जानते ही है लोग उनकी बृद्धि प्रतिभा की बहुत तारीफ करते थे कुछ लोग उनको मुर्ख गधा भी कहेते थै। उनके बुद्धिचातुर्य कें बारे में एक कथा बहुत प्रचलित है तो आप भी सुनिये।

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन इतने गरीब हो गये कि उनको घर घर भटक के भीख मागने का समय आ गया। मुल्ला का बडी मुश्किल से पेट भरता था। मुल्ला हमेशा अपने नगर के बाजार में भीख मांगने जाते थे। इस बात से उनके विरोधीओ के चहेरे पर अजबसी मुस्कान आ गई थी वो लोग बहुत खुश थै।

मुल्ला को जलाने के लिए वो हर दिन कोई ना कोई नयां षडयंत्र रचते थे। वो मुल्ला के सामने खडे होकर अपने दोनो हाथ में सिक्के रखते थै जिस में एक सोने का और दूसरा चाँदी का सिक्का रहेता था। वो मुल्ला को दोनो में से कोइ एक सिक्का लेने के लिए कहेते थै। हमारे मुल्लाजी हमेशा चाँदी का सिक्का पसंद करते थै।

उनकी यह मुर्खता से उनके विरोधी इतने खुश होते थै कि वो मुल्ला के सामने ही नांचने लगते थै लेकिन मुल्ला कभी भी इस बात का बुरा नहीं मानते थै।

एक दिन उस नगर में एक सज्जन भ्रमण के लिए आये। उन्होने यह नजारा अपनी आंखो से देखा। उनको मुल्ला पर बडा तरस आया। वह उनके पास गए और एक कोने मे ले जाकर उनसे कहा।

'मुल्लाजी आप जानते है कि चाँदी के सिक्के की तुलना में सोने के सिक्के की किमत ज्यादा है फिर भी आप हमेशा चाँदी का सिक्का ही क्यों पसंद करते हो। आप शायद नहीं जानते लेकिन इस बहाने लोग आपकी खिल्ली उडाते है। आपको तो सोने का सिक्का पसंद करना चाहीए।'

सज्जन की बात सुनकर मुल्ला थोडी देर तक खामोश रहे उन्होने सज्जन के प्रति अपना आभार व्यक्त किया और साथ में कुछ एसा कहां जिसे सुनकर सज्जन भी मान गए की सच में मुल्ला दुनिया के बुद्धिशाली व्यक्तिओ मे से एक है'

मुल्ला ने कहा था कि 'सज्जन आपकी बात को मे भी जानता हुं। मे भी जानता हुं कि चाँदी के सिक्के की तुलना में सोने का मुल्य ज्यादा है। लेकिन आप समझ नहीं रहे अगर मे ने जीस दिन से सोने का सिक्का ले लिया उस दिन से यह लोग समझ जाएंगे कि में उनको मुर्ख समझता हुं और बाद में वह कभी भी मेरे सामने दोनो सिक्के नहीं रखेंगे। आप को बताना चाहुंगा आज मेने स्वयं मुर्ख बनके कई सारे चांदी के सिक्के इकठ्ठे कर लिए है और आगे भी मुझे इसी प्रकार चांदी के सिक्के मिलते रहेंगे जीससे मेरी द्ररीद्रता दूर हो जाएंगी । यार कभी कभी मुर्ख बनना भी फायदेमंद रहेता है।

जनु की जुबानी

'अगर लोग आपको मुर्ख समझते है तो उसमे कोइ नुकसान नहीं क्योंकि कभी कभी मुर्ख बनने में भी समजदारी है क्योकिं मुर्ख बनने में भी फायदा होता है हमारे मुल्लाजी की तरह। जो लोग अपने आपको बुद्धिशाली मानते रहेते है वो कुछ उस मटके कि तरह होते है जिसके उपर तो मख्खन लगा हुआ है लेकिन अंदर विष भरा हुआ रहेता है। वो लोग हमेशा अपने ही काम के गुनगान गाते रहेते है और वास्तव में वह किसी काम कें नही।' '

कहावत है ना कि बैलगाडी के नीचे चलने वाला कुत्ता हमेशा यहीं भ्रम में रहेता है कि पूरा बैलगाडी का भार वह अकेला ढो रहा है वास्तव में हकिकत कुछ और बयां करती है।'

आप अच्छी तरह से समज रहे है कि मै क्यां कहेना चाहता हुं.....समज रहे है ना...

(सुनिएजी... हमारी हिन्दी बहुत खराब है कृपया सुधारके पढने का कष्ट करीएंगा और हा अपनी प्रतिक्रिया भी भेजएंगा हमे आपका इंतजार है। )

प्रतिसाद

Re: मुल्ला नसीरुद्दीन और चाँदी का सिक्का
आप तो मुल्ला नसीरुद्दीन से भी ज्यादा बुद्धीमान और चालाक मामूल पडते हो ।
Re: मुल्ला नसीरुद्दीन और चाँदी का सिक्का
अरे साहब यही तो है आज का मुल्ला नसीरुद्दीन... दिखता भी वैसे ही है...... हा हा हा
Re: मुल्ला नसीरुद्दीन और चाँदी का सिक्का
शायद नसुरुद्दीन के इस तरह के किस्से पढ़कर ही आप बुद्धिमान बने हैं। अपनी बुद्धि को और बढ़ाएँ और कुछ और किस्से सुनाएँ।
Re: मुल्ला नसीरुद्दीन और चाँदी का सिक्का
मुल्ला नसीरुद्‍दीन की कहानी अच्छी है....
अस्वीकरण