एक दिन हम और तुम सुबह सुबह रास्ते में अचानक ही मिल गए।
हम : अरे तुम आज तुम बडे. ही खुश दिख रहे हो...कुछ खास बात है क्यां ?
तुम : हा में नन्ने को अरे सोरी 'नैनो' को खरीदने जा रहा हु।
हम : भला वो कोन सी बला का नाम है ? हमारे घर के पास जो रहेती है उनका नाम तो नैना मोसी है...जीन की बत्तीसी भी कोई चूराके ले गयां...या फीर तुम रमेश भैया की बिल्ली नैनो की बात कर रहे हो...जो हर दिन सब के घर का दूध पी जाती है।
तुम : अरे में नैनो की लखटकिया कार की बात कर रहा हुं।
हम : अच्छा....लखटकिया कार ?
तुम : हा सिर्फ लाख रूपये की कार है वो...
हम : क्यां बात है मेरे लखपति.... वेसे यह तो बताओ तुम ने कोन सी बेंक से लोन ली....में तुम्हे एक बात बताना भूल ही गया की कल वो कीराना वाले राजु भाई, धोबी छगन भाई और दुघ वाले हीरा भाई तुम्हारे घर के चक्कर कांट रहे थे..कह रहे थे की कहा गया 'तुम' आज तो उसकी खैर नही। दो महिने से हमारा बील नही चूकांया उसने...मेने कहा आपने बाथरूम, लेट्रींग में देखा था ? उन्होने कहा हम तो बेडरुम तक पहोंच गये लेकिन कही भी 'तुम' नही दिखा. वेसे तुम कल कहा थे। तुम्हारी साइकल तो घर के बहार खडी थी।
तुम : वो तो में मीठाई खरीदने गयां था। यार कार जो लेने वाला हुं लोगो को मीठाई तो देनी पडेंगी। शहेर की सब से सस्ती और अच्छी दुकान से मीठाई लाया हुं। पहेले वो 40 रूपैये के किलो जांबुन दे रहा था मुश्किल से 25 रुपैये मे माना। यह लो तुम भी चख्खो..
हम : नहीं नहीं आप ही चखो और हा थोडी सी मीठाई वो राजुभाई, हीराभाई और छगन भाई के घर भी दे आना। सुबह से तुम्हारे घर के चक्कर काट रहे है। शायद तुम्हे कार खरीदने की बधाई भी देने आए थे तुम तो नही मिले साईकल ही उठा के ले गये।
(इस लेखक की हिन्दी बहुत खराब है कृपया सुधार के पढे )

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