श्रेणियाँ: एक्स्ट्रा स्टोरी
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जनवरी 2008
'30 जनवरी का वह दिन आज भी मुझे याद है उस समय में हिंदुस्तान टाईम्स में काम कर रहाँ था और हमे हमारे संपादक ने इस घटनाक्रम कें बारे में... और पढ़ें...
उनकी गलती सिर्फ इतनी थी की उन्होने रोशनी के ईलेक्ट्रीक तार को महात्माजी के गले में डाल दी बस फिर क्यां होना था। बस जन्म ले लिया एक नये विवाद ने... और पढ़ें...
20 साल पहले रविवार के दिन सभी शहरों और गाँवों में लोग अपना सारा काम छोड़कर इडियट बॉक्स (टीवी) के सामने बैठ जाते थे, क्योंकि उनका पसंदीदा धारावाहिक 'रामायण' प्रसारित होता था। रामानंद सागर के इस पौराणिक धारावाहिक ने उस समय सफलता के तमाम परचम लहराए थे और लोगों के दिलों पर राज... और पढ़ें...
मैंने ऐसा तो कुछ गलत नहीं कहा था कि तुम सब के सामने मुझे डाँटने लगे। तुम नहीं जानते मेरे दिल पर क्या बीत रही है। हर बार तुम अपने प्यार का वास्ता दे देते हो। हर बार तुम ही कहते रहते हो कि... और पढ़ें...
' द वन वु केअर मोस्ट ' यहीं विषय था उस प्रतियोगिता का जीसमे सभी प्रतिभागियो ने भाग लिया। इन प्रतिभागियो में एक छोटा प्रतिभागी भी था जिसकी उमर सिर्फ दस साल की थी और यहीं बच्चा स्पर्धा में विजयी हुआ। आखिर उसने एसा क्यां किया जो उसे ईनाम मिला ? और पढ़ें...